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जयपुर

आयोजन: मदद फाउंडेशन ने सिलाई (25वां बैच) और मेहंदी (3-4 बैच) के 50 छात्रों को सर्टिफिकेट दिए। उपलब्धि: संस्थापक डॉ. मीनाक्षी सेठी के अनुसार, पिछले 3 सालों में 1200 महिलाओं को हुनर सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। अतिथि: कार्यक्रम में डॉ. समरा सुल्ताना और पीसीसी सचिव रेनू नायक शामिल हुईं और संस्था के काम की तारीफ की। उत्सव: कार्यक्रम के दौरान नववर्ष का जश्न भी मनाया गया। Read More

भाजपा का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन जातीय संतुलन जरूरी: चंद्रराज सिंघवी

जयपुर

मुद्दा: वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रराज सिंघवी ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी पर चिंता जताई है। जातीय समीकरण: उन्होंने कहा कि राजस्थान में जाति निर्णायक है। जैन समाज को हमेशा 3 मंत्री पद मिलते रहे हैं, जो अभी नहीं हैं। किरोड़ी लाल का समर्थन: सिंघवी ने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को मीणा समाज का सबसे बड़ा नेता बताते हुए उनके साथ न्याय करने की वकालत की। पार्टी का भविष्य:…

हिंदू संगठनों को सरकार और सुरक्षा बलों पर भरोसा रखना चाहिए:

जयपुर

दो घटनाएं: गाजियाबाद में पिंकी चौधरी (हिंदू रक्षा दल) ने 'आत्मरक्षा' के नाम पर तलवारें बांटी, जबकि लखनऊ में AIMIM ने शिक्षा का संदेश देते हुए पेन-फूल बांटे। सवाल: रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि जब पीएम, गृहमंत्री और सेना-पुलिस में बहुसंख्यक समाज का वर्चस्व है, तो डर कैसा? तर्क: मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि घट रही है और वे आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, इसलिए उनसे खतरा महसूस करना केवल…

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भाजपा सरकार जनता के हक और हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है:

जयपुर

आरोप: पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर पंचायत चुनाव में देरी करने और जनता के हकों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। संवैधानिक चूक: उन्होंने कहा कि कार्यकाल पूरा होने के एक साल बाद भी चुनाव न कराना संवैधानिक गलती है। फंड का खतरा: डोटासरा ने चेतावनी दी है कि यदि मार्च 2026 तक चुनाव नहीं कराए गए, तो केंद्र सरकार से ग्रामीण विकास के लिए…

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ऐतिहासिक पहल:

जयपुर

बड़ा फैसला: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर 'मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना' (MAA) अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देशव्यापी इलाज: 19 दिसंबर से 'आउट बाउंड पोर्टेबिलिटी' शुरू हो गई है, जिससे राजस्थानी नागरिक अब दूसरे राज्यों में भी फ्री इलाज करा सकते हैं। अस्पताल नेटवर्क: देश भर के (तमिलनाडु और कर्नाटक को छोड़कर) 30,000 से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल इसमें शामिल किए गए हैं। बड़े…

कोटा के उद्धव गुप्ता को मिला 1 करोड़ से ज्यादा का पैकेज:

कोटा

कोटा के छात्र उद्धव गुप्ता ने आईआईटी गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें मल्टीनेशनल कंपनी डेटाब्रिक्स ने 1 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना पैकेज ऑफर किया है। उद्धव ने 2022 में JEE एडवांस्ड में 514वीं रैंक हासिल की थी। वे 2026 में अपनी डिग्री पूरी करने के बाद बेंगलुरु में एआई और डेटा साइंस के क्षेत्र में काम करेंगे। उन्होंने अपनी…

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प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

जयपुर

यह लेख एक एजुकेशनल क्विज़ (प्रश्नोत्तरी) है जो मध्यकालीन भारतीय इतिहास पर केंद्रित है। इसमें भक्ति आंदोलन (कबीर, नानक), सूफीवाद, दिल्ली सल्तनत (तुगलक, सैयद, लोदी वंश) और मुगल साम्राज्य (बाबर, अकबर, हुमायूँ) से संबंधित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) शामिल किए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न के साथ उसका सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या दी गई है ताकि पाठकों और छात्रों को इतिहास की घटनाओं को समझने में आसानी हो।

सीरत-उन-नबी: पैगंबर साहब का जीवन आज भी मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ

जयपुर

यह लेख 'सीरत-उन-नबी' (पैगंबर मुहम्मद साहब की जीवनी) की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कैसे पैगंबर साहब का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और नैतिकता का व्यावहारिक उदाहरण है। लेख में विशेष रूप से कानून के शासन, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, शत्रुओं के प्रति क्षमाशीलता और मातृभूमि के प्रति प्रेम (देशभक्ति) जैसे विषयों को उजागर किया गया है। अंत में, यह…

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया: आखिर क्यों कहलाए “मेहबूब-ए-इलाही”?

जयपुर

यह लेख सूफी संत हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के जीवन की एक प्रमुख घटना का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे उनके गुरु बाबा फरीद ने उनसे पूछा कि वे 'मुहिब' (प्रेमी) बनना चाहते हैं या 'मेहबूब' (प्रिय)। अपनी माँ की सलाह पर जब वे एक मज़जूब (फकीर) के पास पहुंचे, तो उस मज़जूब ने मृत्यु के बाद उन्हें 'मेहबूब' बनने की सलाह दी ताकि दुनिया उन्हें इज़्ज़त…

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मौलाना मोहम्मद अली जौहर: कलम, क़ुर्बानी और क़ौमी एकता की ज़िंदा मिसाल

जयपुर

यह लेख भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कैसे उन्होंने ऑक्सफोर्ड से पढ़ने के बावजूद अंग्रेजों के खिलाफ 'कॉमरेड' और 'हमदर्द' अखबारों के जरिए विद्रोह का बिगुल फूंका। लेख में खिलाफत आंदोलन में उनकी भूमिका और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए उनके प्रयासों का वर्णन है। सबसे महत्वपूर्ण, इसमें उस वाकये का जिक्र है…

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