भाजपा का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन जातीय संतुलन जरूरी: चंद्रराज सिंघवी
पूर्व मंत्री ने मंत्रिमंडल विस्तार और किरोड़ी लाल मीणा पर बेबाकी से रखी राय
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान में लंबे समय से लंबित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है। इस मुद्दे पर ‘रॉयल पत्रिका’ से खास बातचीत में वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, अनुभवी नेता और सटीक राजनीतिक विश्लेषक चंद्रराज सिंघवी ने बेबाकी से अपनी राय रखी।
अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के साथ काम कर चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री सिंघवी ने स्पष्ट कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है, इसके लिए पूरी तैयारी और संतुलन जरूरी होता है।
मंत्रिमंडल विस्तार: ‘दिल खोलकर’ हो फैसला
सिंघवी ने कहा कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान का होता है, लेकिन जो भी निर्णय लिया जाए, वह “दिल खोलकर” लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि केवल प्रतीक्षा कराने से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है।
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उपचुनाव का वादा: उन्होंने याद दिलाया कि राजस्थान में हुए उपचुनावों के समय यह चर्चा थी कि जिन सात सीटों पर जीत होगी, उनमें से कुछ विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। उस समय कई नाम सामने आए थे, लेकिन अब तक विस्तार न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
जातीय समीकरण: किरोड़ी लाल और जैन समाज की अनदेखी?
वरिष्ठ नेता ने जातीय प्रतिनिधित्व को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति में जातीय समीकरण आज भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
जैन समाज का प्रतिनिधित्व
सिंघवी ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज तक शायद ही कोई ऐसा मंत्रिमंडल रहा हो जिसमें तीन से कम कैबिनेट मंत्री जैन समाज से रहे हों, जबकि वर्तमान स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। यदि किसी जाति का पार्टी में बड़ा जनाधार है और उसे उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तो यह पार्टी के हित में नहीं है।
किरोड़ी लाल मीणा पर बड़ा बयान
उन्होंने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का नाम लेते हुए कहा कि वे मीणा समाज के सबसे बड़े और प्रभावशाली नेता हैं।
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राय: उनके अनुसार किरोड़ी लाल मीणा जैसे अनुभवी, ईमानदार और संघर्षशील नेता के साथ न्याय होना चाहिए।
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चेतावनी: यदि जातीय संतुलन को नजरअंदाज किया गया, तो इसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।
“मैं याचक नहीं हूँ”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधों पर पूछे गए सवाल पर वरिष्ठ नेता ने स्वाभिमान के साथ कहा कि वे याचक बनकर किसी के सामने हाथ नहीं फैलाते। जरूरत पड़ी तो समय मांगा जा सकता है, लेकिन सम्मान से। उन्होंने यह भी बताया कि वे राजस्थान की समस्याओं को राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा चुके हैं।
राजनीति का बदलता स्वरूप
राजस्थान की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज राजनीति का स्वरूप बदल गया है। पहले योग्यता और विचारधारा को महत्व मिलता था, लेकिन अब कई बार दिखावे और प्रभाव के आधार पर फैसले होते हैं।
निष्कर्ष: इसके बावजूद उन्होंने भाजपा के भविष्य को उज्ज्वल बताया और कहा कि पार्टी को सभी समाजों को साथ लेकर चलना होगा। यदि समय रहते संतुलन और न्याय नहीं किया गया, तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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