हिंदू संगठनों को सरकार और सुरक्षा बलों पर भरोसा रखना चाहिए:
तलवार बनाम कलम की राजनीति
गाजियाबाद में तलवारें बंटीं, तो लखनऊ में एआईएमआईएम ने बांटे फूल और कलम
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। देश के दो अलग-अलग शहरों से दो विपरीत विचारधारा वाली तस्वीरें सामने आई हैं। एक तरफ गाजियाबाद में हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी के नेतृत्व में हिंदू परिवारों को घर-घर जाकर तलवारें बांटी गईं, वहीं दूसरी तरफ लखनऊ में एआईएमआईएम (AIMIM) के कार्यकर्ताओं ने जवाब में घर-घर जाकर पेन और फूल बांटने का काम किया।
तलवार वितरण और सुरक्षा का तर्क
गाजियाबाद में पिंकी चौधरी ने तलवारें बांटते हुए तर्क दिया कि हिंदुओं को अपनी बहन-बेटियों की रक्षा के लिए अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी। हालांकि, कानूनन 6 इंच के चाकू से बड़ा हथियार रखना, चलाना या बांटना गैर-कानूनी माना जाता है।
सरकार और सिस्टम पर क्यों नहीं है भरोसा?
पिंकी चौधरी और अन्य हिंदूवादी संगठनों के इस कदम पर सवाल उठ रहे हैं। संपादकीय नजरिए से देखा जाए तो पिंकी चौधरी को यह समझने की जरूरत है कि देश में बहुसंख्यक आबादी (80%) हिंदुओं की है।
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राजनीतिक नेतृत्व: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जैसे सशक्त नेता देश की बागडोर संभाल रहे हैं।
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सुरक्षा बल: देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख और भारतीय सेना में बड़ा हिस्सा बहुसंख्यक समुदाय से है। अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस में भी यही स्थिति है।
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ब्यूरोक्रेसी: प्रशासन में आईएएस से लेकर निचले स्तर तक बहुसंख्यक समाज का प्रतिनिधित्व है।
ऐसे में यह डर समझ से परे है। जानकारों का मानना है कि यह डर एक मनोवैज्ञानिक (Psychological) स्थिति है, जिसमें सच्चाई कम है। यदि वास्तव में खतरा होता और यह तरीका सही होता, तो सरकार पिंकी चौधरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों करती?
जनसांख्यिकी और हकीकत
आंकड़ों की बात करें तो देश में हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात लगभग 80:20 का है। मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर लगातार घट रही है। एक अनुमान के मुताबिक, अगले एक हजार वर्षों तक भी जनसांख्यिकी संतुलन बिगड़ने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 95%) गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहा है और शिक्षा के अभाव से जूझ रहा है।
फूल और कलम बांटना: एक सकारात्मक संदेश
दूसरी ओर, एआईएमआईएम के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में घर-घर जाकर कलम और फूल बांटे। उनका संदेश था कि जीवन में रक्षा और तरक्की के लिए हथियार नहीं, बल्कि शिक्षा (कलम) जरूरी है।
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शिक्षा और भाईचारा: देश के विकास के लिए शांति, भाईचारा और आपसी मेल-जोल अनिवार्य है।
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असली मुद्दे: देश में राजनीति के मुद्दे शिक्षा, रोजगार, विकास, तकनीक और सामाजिक सुधार होने चाहिए।
निष्कर्ष: देश को क्या चाहिए?
देश का माहौल बदलना जरूरी है। शिक्षित नागरिक ही देश को आगे ले जा सकते हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम दुर्घटनाओं, नशाखोरी, ड्रग्स और बीमारी से हो रही मौतों पर आवाज उठाएं और बेसहारा व गरीबों की मदद करें। हिंदू संगठनों और कार्यकर्ताओं को देश के शासकों, सेना और पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।
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