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ग़ज़ल

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ग़ज़ल दिल का सूना पन कुछ शोर चाहता है रात का अंधेरा भी इक भोर चाहता है लालच इस  क़दर ... Read more Read More

ग़ज़ल

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उनकी मोहब्बत  का मयार  तुम क्या जानो ख़्याल  रखता  हूं के इज़हार  ना  होने पाए ग़म लकीरों  में बयां  होता तो कर  भी लेता देखना  ये  कभी  अखबार   ना   होने  पाए दिल खुश रखने के  काम भी  करता हूं... Read more

गंगा बहाईये

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    चूल्हे  की  आग  पेट  में  अपने  जलाईये कुछ अधजली  लकड़ियां  मुंह में दबाइये हल्का अंधेरा पी के  उगल ... Read more

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हर कण मुझे दे दो

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  तुम्हारी  सुरमई आंखों  में  चिनगारी  सुलगने  दो सुलगने दो तुम्हारी देह की इच्छा ओं को खुलकर तरसने  पाऐ  ना ... Read more

ग़ज़ल

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शहर में उसके जो आया लुटना था उसका लाज़िमी इसका अब क्या करें लुटकर कोई जाता ना था   लफ़्ज़... Read more

ग़ज़ल

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आंधियों ने चिमनियों को दिला दिया यक़ीन हम आ गयीं  तो क्या  तुम्हें  बझने  नही देंगे तुमसे   तुम्हारा  हुनर   नहीं  ... Read more

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ग़ज़ल

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किसी  भी   मोड़  से  मुझको न अब सदा देना। तमाम   नक़्श    मुहब्बत   के  तुम  मिटा  देना।।   चलो   तबाही   पे  ... Read more

ग़ज़ल

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तेरी  बाहों  में  गुजार  कर   एक  अय्याम  देखूंगा तेरा  दिल के आसमान पर लिख कर नाम देखूंगा   देखूंगा  होती ... Read more

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ग़ज़ल

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सवाल हूं मैं तो जवाब बन जा गर नींद हूं मैं तो ख्वाब बन जा मैंने ढूंढा है बहुत कोहसारों ... Read more

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