ग़ज़ल
फ़ज़लुर्रहमान की यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई, दर्द और हौसलों का संगम है। इसमें यादों की कसक, ज़िंदगी की उलझनें और गीतों में मोहब्बत का जन्म बख़ूबी बयान किया गया है। शायर ने ग़म के बीच तसल्लियों, तूफ़ानों में हौसलों और कलम की ताक़त को दिलकश अंदाज़ में पेश किया है। Read More
