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ग़ज़ल

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फ़ज़लुर्रहमान की यह ग़ज़ल मोहब्बत, जुदाई, दर्द और हौसलों का संगम है। इसमें यादों की कसक, ज़िंदगी की उलझनें और गीतों में मोहब्बत का जन्म बख़ूबी बयान किया गया है। शायर ने ग़म के बीच तसल्लियों, तूफ़ानों में हौसलों और कलम की ताक़त को दिलकश अंदाज़ में पेश किया है। Read More

ग़ज़ल

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फ़ज़लुर्रहमान की यह ग़ज़ल दर्द, मोहब्बत, इबादत और इंसानी किरदार की हक़ीक़त को बयाँ करती है। इसमें बियाबां में पड़े बुतों, दिलों से गुज़रती अज़ानों और मोहब्बत में बेदलील सच्चाई का तज़किरा मिलता है। शायरी इंसान की रूह और समाज की सच्चाई को आईना दिखाती है।

रोज़ी हलाल रखता हूं

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फ़ज़लुर्रहमान की नज़्म ‘रोज़ी हलाल रखता हूं’ इंसान के ईमान, मोहब्बत और जद्दोजहद की कहानी बयां करती है। इसमें शायर अपने दर्द, सच्चाई, और आत्मसम्मान को बेबाकी से पेश करते हैं। वो दिखाते हैं कि कैसे मुश्किल हालात में भी रोज़ी हलाल कमाना, मोहब्बत निभाना और अपने जज़्बात को संभालना एक इंसान की असल पहचान है।

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ख़ुशी अंतहीन चाहिए

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यह शायरी फ़ज़लुर्रहमान की कलम से निकली एक गहरी सामाजिक और रूहानी सोच का प्रतिबिंब है। इसमें इंसान की अंतहीन खुशियों की तलाश, हर चेहरे पर मुस्कान की ख्वाहिश, और रूहानी इबादत की सच्चाई को शिद्दत से बयां किया गया है। शायर सत्ता, समाज और धार्मिक पाखंड पर सवाल उठाते हुए इंसानियत, रोटी, मकान और अमन की मांग करता है। शायरी का हर शेर सोचने पर मजबूर करता है कि…

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यह ग़ज़ल जीवन की फानी हकीकतों और सामाजिक व्यवहारों पर गहरा तंज है। शायर ने इस फना होने वाली दुनिया से दोस्ती को गलत बताया है और गरीबी में भी इंसानियत के साथ खिलवाड़ को नापसंद किया है। जवानी की मस्ती के बाद की उम्र में हल्की सोच पर सवाल उठाया गया है। शायर कहता है कि अगर इज्जत मिल रही है तो वो किसी की दुआओं की बदौलत है,…

आंचल गिराए नहीं जाते

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यह शायरी रिश्तों की पाकीज़गी, जज़्बात की गहराई और ज़िंदगी के तल्ख़ तजुर्बों पर रोशनी डालती है। इसमें बताया गया है कि सच्चे रिश्ते बनते नहीं, खुद बन जाते हैं और जज़्बात खरीदे नहीं जाते। शायर बताता है कि रूह को संवारिए, क्योंकि जिस्म तो फानी है। शायरी भावनाओं का एक ख़ूबसूरत आईना है।

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बिन ब्याहे अर्पण का

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फ़ज़लुर्रहमान की यह कविता यौवन, प्रेम, तर्पण और जीवन के दर्शन को छूते हुए मनोवैज्ञानिक यात्रा प्रस्तुत करती है। इसमें अर्पण (समर्पण) और बिना विवाह के प्रेम संबंधों की उलझन, सावन में प्रेम की कथा, पूर्वजों के तर्पण का महत्व, लक्ष्मण रेखा का मिटना और महाकाव्य में दोष मिटाने की कठिनाई जैसी जीवन के विभिन्न बिंदुओं को शायरी के अंदाज़ में छूआ गया है।

ज़िन्दगी क्या है?

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यह लेख ज़िन्दगी की हकीकत और उसके मक़सद पर रोशनी डालता है। इसमें बताया गया है: ज़िन्दगी एक जलता चिराग़ और खुदा की अमानत है जो एक दिन बुझ जाएगी। यह जद्दोजहद और कांटों से भरी राह है, जिसमें मोहब्बत फूल की खुशबू की तरह है। ज़िन्दगी एक तोहफा और नेमत है, जिसका शुक्र अदा करना चाहिए। हर कदम पर फूल बिखेर कर इंसान अपनी ज़िन्दगी को बाग बना सकता…

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फ़ज़लुर्रहमान, सहायक सचिव (सेवानिवृत्त), ने इस ग़ज़ल में ज़िंदगी, दिल और इंसानी जज़्बातों को सरल और असरदार अंदाज़ में बयां किया है। ग़ज़ल में नेकियों, दिल की बेताबी, और मंज़िल की तलाश जैसे मुद्दों को शायराना अंदाज़ में पेश किया गया है। शेर दर शेर यह ग़ज़ल दिल को छूती है और सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे इंसान दौलत और दुनिया की भागदौड़ में अपने दिल की आवाज़…

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“सुनहरे मोती”

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“सुनहरे मोती” ज़िन्दगी का असल मज़ा इसी में है कि हमेशा तकलीफों और मुसिबतों का मुकाबला करो और उसके साथ-साथ... Read more

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