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5 दिन में बदली तस्वीर: अमरनाथ गुफा में शिवलिंग पूरी तरह पिघला, 3 लाख श्रद्धालुओं का दर्शन करना बाकी

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5 दिन में बदली तस्वीर: अमरनाथ गुफा में शिवलिंग पूरी तरह पिघला, 3 लाख श्रद्धालुओं का दर्शन करना बाकी

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Amarnath Yatra 2026 : जम्मू। अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर पवित्र गुफा में बनने वाला प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग (हिमलिंग) लगभग पूरी तरह पिघल गया है। हाल ही में सामने आई ताजा तस्वीरों में हिमलिंग का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा गायब दिखाई दे रहा है। हालांकि, इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और बड़ी संख्या में लोग लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई है और यह 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलेगी। कुल 57 दिनों की इस यात्रा के पहले चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके थे। अधिकारियों के अनुसार, पांचवें दिन यानी मंगलवार तक यह संख्या 1 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद है। यात्रा के लिए इस साल 4 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यानी कि अभी 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का दर्शन करना बाकी है।

23 मई को 7 फीट का था शिवलिंग

23 मई को BSF के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था। 29 जून को पहली पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 6 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग लगभग 90 फीसदी गायब हो चुका है। श्रद्धालु दो प्रमुख मार्गों से अमरनाथ गुफा तक पहुंच रहे हैं। पहला 48 किलोमीटर लंबा पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जबकि दूसरा 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग है, जो छोटा जरूर है लेकिन काफी कठिन माना जाता है।

अमरनाथ के बाबा बर्फानी प्राकृतिक बनते हैं

अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में जमीन से खनिज जमा होकर स्टैलेग्माइट बनते हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है। इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग होता है। यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है।

क्या शिवलिंग गायब होने से यात्रा पर पड़ेगा असर

अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग तेजी से पिघलने के बाद श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हिम शिवलिंग दोबारा बन सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार इसकी संभावना बहुत कम होती है। यदि आने वाले दिनों में ताजा बर्फबारी हो जाए या गुफा का तापमान फिर से शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाए, तभी हिम शिवलिंग दोबारा बनने की संभावना हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में ऐसा होना मुश्किल माना जाता है।

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अमरनाथ में कैसे बनता है प्राकृतिक शिवलिंग?

एक और सवाल यह है कि अमरनाथ का प्राकृतिक शिवलिंग आखिर बनता कैसे है? दरअसल, यह किसी इंसान द्वारा तराशकर नहीं बनाया जाता। सर्दियों और वसंत के मौसम में गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदें बेहद कम तापमान में धीरे-धीरे जमती रहती हैं। इसी प्रक्रिया से बर्फ की परतें बनती हैं और समय के साथ प्राकृतिक हिम शिवलिंग का आकार तैयार होता है। हर साल मौसम और तापमान के अनुसार इसका आकार अलग-अलग होता है।

क्या शिवलिंग पिघलने से रुक जाएगी अमरनाथ यात्रा?

वहीं कई श्रद्धालु यह भी जानना चाहते हैं कि हिम शिवलिंग के पिघल जाने से क्या अमरनाथ यात्रा रोक दी जाएगी। इसके लिए आपको बता दें कि फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है। प्रशासन की ओर से यात्रा रोकने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यात्रा पहले की तरह जारी है और श्रद्धालु लगातार बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अब तक 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु अमरनाथ गुफा पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। प्रशासन के अनुसार इस साल करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी।

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