Loading...

4 माह की मासूम से दरिंदगी के दोषी को आसाराम जैसी सजा; फैसला सुनाते जज की आंखें नम, बोले- ‘पशु कहना भी गलत, वो भी ऐसा नहीं करते’

4 माह की मासूम से दरिंदगी के दोषी को आसाराम जैसी सजा; फैसला सुनाते जज की आंखें नम, बोले- ‘पशु कहना भी गलत, वो भी ऐसा नहीं करते’

Follow us

Share

जोधपुर। चार माह की मासूम से दुष्कर्म के मामले में जोधपुर जिला विशेष न्यायालय (पॉक्सो) के न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने आरोपी को आजीवन जेल और 1 लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। ऐसी ही सजा आसाराम को तत्कालीन न्यायाधीश ने नाबालिग के साथ यौन शोषण के मामले में दी थी। यह मामला बहुत गंभीर था, जिसमें पीड़िता अबोध सिर्फ चार माह की है।

सोमवार को सजा सुनाते हुए जज की आंखें नम हो गई। उन्होंने फैसला सुनाते हुए जज ने कवियत्री हीना जैन की पंक्तियां लिखीं… क्या यही है मर्द की पहचान….शर्म करो मर्द। इसी के साथ न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने पीड़िता के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए 15 लाख रुपए की प्रतिकर राशि एफडी के रूप में बालिग होने तक जमा कराने और मासिक ब्याज पीड़िता की माता को पालन-पोषण के लिए देने के आदेश भी पारित किए। यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राज्य सरकार की पीड़ित प्रतिकर योजना में दी जाएगी। न्यायाधीश डॉ. दत्त को यह फैसला लिखवाने में सात दिन का समय लगा। मामले में पीड़िता की ओर से पैरवी करने वाले विशिष्ट लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने बताया कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला था। फैसले में न्यायाधीश ने समाज को संदेश दिया है।

‘क्या यही है तुम मर्दों की पहचान?
अरे शर्म करो तुम मर्द, समझो उस लड़की का दर्द
आओ दिखाओ अपनी मर्दानगी
क्या अब वह इज्जत से बन पाएगी किसी की बेटी, बहू या अर्धागिनी
अरे शर्म करो तुम मर्द ! समझो उस लड़की का दर्द।’

बिहार का रहने वाला है आरोपी

विशिष्ट लोक अभियोजक ने बताया कि 21 वर्षीय आरोपी मूलतः बिहार का रहने वाला है। ग्रामीण क्षेत्र में वह पीड़िता के पिता के साथ फैक्ट्री में काम करता था। दोनों फैक्ट्री परिसर में पास रहते थे। पिछले साल होली के दिन आरोपी कमरे पर आया था। तब बच्ची की मां कुछ देर के लिए बाहर गई। इसी दौरान आरोपी ने दुष्कर्म किया। घटना के बाद लोगों ने आरोपी को मौके से पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। पुलिस ने अनुसंधान कर चार्जशीट पेश की। विचारण के दौरान राज्य सरकार ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने 23 मौखिक साक्ष्य, 49 दस्तावेजी साक्ष्य तथा 4 भौतिक वस्तुएं कोर्ट में पेश कर कठोर दंड की मांग की थी।

Advertisement

‘पशु कहना भी गलत, वो अमानवीय नहीं करते’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चिकित्सीय, वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को संदेह से परे दोषसिद्ध मानते हुए यह सजा सुनाई है। अपने 66 पेज के फैसले में न्यायाधीश ने लिखा है कि फैसला निर्णय लिखते समय उन्हें गहरी वेदना हुई। जिस देश में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, वहां इस प्रकार की घटना ने मन झकझोर दिया है। ऐसे अपराधी के लिए ‘पशुवत’ शब्द का प्रयोग भी उचित नहीं है, क्योंकि पशु भी अपने स्वाभाविक नियमों के विपरीत इस प्रकार का अमानवीय कृत्य नहीं करते।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।