मुसलमानों में बढ़ती नशे की लत
“ऐ नौजवानों! तुम उम्मत की रीढ़ हो। तुम्हें इस नशे की बीमारी से निकलकर उम्मत का सहारा बनना है। नशा नहीं, इबादत और इल्म तुम्हारा रास्ता हो।”
(मौलाना ज़करिया कांधलवी रह.)
आज हमारे मुस्लिम समाज के नौजवानों में बढ़ती नशे की लत ने उनकी ज़िंदगी और उनके मुस्तकबिल (भविष्य) को बर्बाद कर दिया है। असल में, नौजवान चाहे मुसलमान का हो या हिंदू का, अगर वह इस लत में पड़ता है तो इसका बुरा असर पूरे समाज और हमारे प्यारे भारत पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि इस नशे की बीमारी को कैसे रोका जाए।
नशे की वजहें
1 बुरी संगत में उठना-बैठना – यह बीमारी अक्सर गलत दोस्तों और ग़लत माहौल से फैलती है।
2 मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल – फ़िल्में, वेब सीरीज़ और म्यूज़िक वीडियोज़ में नशे को फैशन और मज़ा बनाकर दिखाया जाता है। इससे नौजवान इसे “कूल” समझने लगते हैं।
3 घर का माहौल और मायूसी – माँ-बाप के झगड़े, तालीम में नाकामी, बेरोज़गारी या इमोशनल तकलीफ़ की वजह से नौजवान अंदर से टूट जाते हैं और नशे की तरफ भागते हैं।
नशे को कैसे रोका जाए ?
आखरी पैगम्बर ने फरमाया:
“अल्लाह का वादा है उस शख्स से जो नशा करने वाली चीज़ पिए कि अल्लाह उसे जहन्नम की गंदगी पिलाएगा।”
पूछा गया: “या रसूलल्लाह! जहन्नम की गंदगी क्या है?”
आप ने फरमाया: “दोज़खियों का पसीना और उनकी गंदी रस।”
सबसे पहले तो ये याद रखें कि नशा आखिरत का नुकसान है, और यही सबसे बड़ा नुकसान है, क्योंकि हमारी असली ज़िंदगी आखिरत ही है।
दूसरा, अपनी उठने-बैठने वाली संगत को बदलें, अच्छे और नेक दोस्तों का साथ अपनाएँ।
तीसरा, ये तसव्वुर दिमाग से निकाल दें कि नशा करना कोई “कूल” बनने की निशानी है। असल में यह एक गंदी और बुरी आदत है जो आपको दुनिया और आखिरत दोनों में बर्बाद करती है।
और आख़िर में, सोचिए कि जो पैसा आप नशे में खर्च कर रहे हैं, उसका क़यामत के दिन हिसाब देना होगा।
हदीस में आया है:
क़ियामत के दिन इंसान के कदम अल्लाह के सामने से नहीं हटेंगे जब तक उससे ये सवाल न कर लिए जाएँ:
- उसकी उम्र कहाँ गुज़ारी?
- उसने इल्म क्या सीखा और उस पर क्या अमल किया?
- उसने माल कहाँ से कमाया?
- और कहाँ खर्च किया?
- उसने जिस्म किस काम में गलाया?
अब ज़रा सोचिए! अगर आप कहेंगे कि “मैंने अपनी ज़िंदगी में इतने पैसे नशे पर खर्च किए”, तो अल्लाह कितना ग़ज़बनाक होगा!
अल्लाह तआला हम सबको अपने हिफ़्ज़ व अमान में रखे और इस नशे की बुराई से बचाए। आमीन।
(मुहम्मद सोहैल)
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