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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

जयपुर

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वृक्षारोपण ही काफ़ी नहीं, वृक्षों की देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है

पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण की ओर पर्याप्त ध्यान दिया जाने लगा है। यह आवश्यक भी है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण से ही हमारे जीवन का अस्तित्व संभव है।आमतौर पर इस दिन वृक्षारोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, पर्यावरण जागरूकता रैलियाँ निकाली जाती हैं, नाटक आदि का मंचन होता है, पोस्टर प्रतियोगिताएँ रखी जाती हैं और कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। जहाँ तक वृक्षारोपण की बात है, इसमें कोई दो राय नहीं कि वृक्ष अवश्य लगाए जाने चाहिए। कहा भी गया है:

बंजर धरती करे पुकार, वृक्ष लगाकर करें श्रृंगार।”

लेकिन वृक्षारोपण के साथ-साथ कई अन्य बातें भी जुड़ी होती हैं, जिनका ध्यान रखना ज़रूरी है। जैसे कि लगाए गए पौधों की देखभाल। कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. छोटे पौधों के चारों तरफ मिट्टी का थावला (पानी भरने की जगह) अवश्य बनाना चाहिए, ताकि समय-समय पर उन्हें पानी दिया जा सके और पौधों की जड़ों तक उचित मात्रा में हवा पहुँचती रहे, जिससे उनका सही विकास होता रहे।
  2. उनके चारों ओर ट्री-गार्ड अवश्य लगाया जाना चाहिए, ताकि पशुओं से उनकी रक्षा हो सके।
  3. समय-समय पर पौधे की छँटाई (प्रूनिंग) होती रहनी चाहिए, जिससे वह ठीक प्रकार से विकसित हो सके।

आमतौर पर पौधे लगाने के बाद उनकी सुध नहीं ली जाती, जिससे वे धीरे-धीरे मुरझाकर मर जाते हैं। इसके बजाय नियमित रूप से उन्हें पानी देना चाहिए और जानवरों से उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। एक महत्वपूर्ण बात जो प्रायः सभी स्थानों पर देखने को मिलती है, वह है कि वृक्ष पर्याप्त बड़े हो जाने के बाद भी ट्री-गार्ड नहीं हटाए जाते। लोहे के तार, फाइबर शीट या सीमेंट के ट्री-गार्ड अक्सर इस प्रकार लगाए जाते हैं कि बाद में उन्हें आसानी से हटाया नहीं जा सकता। इससे होता यह है कि वृक्ष बनने के बाद भी वे इस प्रकार घेरे रहते हैं कि न तो उनकी अनावश्यक डालियों को हटाया जा सकता है, न ही ठीक से पानी दिया जा सकता है।कई बार तो हवा के कारण तनाएं बार-बार ट्री-गार्ड से टकराते हैं और पेड़ की छाल कट भी जाती है। बहुत से ऐसे पेड़ देखे जा सकते हैं जो ट्री-गार्ड में बुरी तरह फँसे रहते हैं। यह स्थिति वैसी ही होती है जैसे किसी 10-15 साल के बालक को 4-5 साल के बच्चे के कपड़े पहना दिए जाएँ — उस बालक की जो दशा होगी, वैसी ही दशा उस वृक्ष की होती है।

इसके अलावा, कई स्थानों पर पौधों के चारों ओर कंक्रीट का थावला बना दिया जाता है, जो वृक्ष के तने को विकसित नहीं होने देता। कई जगहों पर तो पौधे के तने को चारों ओर से कंक्रीट या डामर की सड़क से ढँक दिया जाता है, जिससे न तो तना विकसित हो पाता है और न ही उसकी जड़ों तक हवा-पानी पहुँच पाता है।

अतः वृक्षारोपण करें यह बहुत अच्छी बात है लेकिन वृक्षों के बड़े होने तक उनकी देखभाल भी अवश्य करें। उनके चारों ओर मिट्टी का कच्चा थावला बनाएं, जब वृक्ष पर्याप्त बड़ा हो जाए तो ट्री-गार्ड काटकर हटा दें, समय-समय पर पानी देते रहें और अनावश्यक डालियों की छँटाई करते रहें, ताकि वृक्ष सही रूप में और पूर्णता के साथ विकसित हो सके।

सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित।
डॉ. श्यामसुंदर बैरवा
सहायक प्रोफेसर, वस्त्र रसायन

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