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प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी रहमतुल्लाह मोहम्मद सयानी 

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4 जून यौमे वफात पर विशेष….

 

रहमतुल्ला मोहम्मद सयानी का जन्म 5 अप्रैल 1848 को मुंबई में हुआ था। सन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अधिवेशन में शामिल होने वाले 72 सदस्यों में से 2 प्रख्यात मुस्लिम नेताओं में से एक थे। वह भारत के पहले अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त मुस्लिम थे। उन्होंने 1868 में पोस्ट ग्रेजुएट की उपाधि हासिल की थी बाद में उन्होंने कानून की पढ़ाई भी की इस दौरान उन्होंने आवाम से जुड़े अनेक मामलों में केस लड़ा उनके द्वारा मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस से जोड़ने के प्रयास सफल हुए इंडियन नेशनल कांग्रेस के आंदोलन को मजबूत करने से देश की आजादी आंदोलन को ताकत मिलेगी इस बात की उन्होंने पुरजोर वकालत भी की।  रहमतुल्लाह सयानी स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दायर मुकदमों की भी पैरवी करके बड़ी तादाद में उन्हें कानूनी अधिकार दिलाया। वे मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के मेयर भी रहे, वह बॉम्बे लेजिसलेटिव काउंसिल और इम्पेलरियल लॉजिस्टिक काउंसलिंग के मेम्बर भी रहे। रहमतुल्लाह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने और कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 12 वें वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता की। इस अधिवेशन में सयानी द्वारा दिया गया भाषण कांग्रेस अधिवेशनों के इतिहास में सर्वोत्तम भाषण में शुमार होता है, इस भाषण को समकालीन जनरलो ने प्रमुखता से छापा गया था। वह हिंदू मुस्लिम एकता के अलंबरदार माने जाते थे और दोनों समुदायों के बीच आपसी भाईचारे के लिए काफी काम किया भारत की स्वतंत्रता आंदोलन में मुसलमानों के शामिल होने के लिए उन्होंने बड़े पैमाने पर प्रेरित किया। रहमतुल्ला सयानी ने अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ लोगों को जागरूक करने में बड़ी भूमिका निभाई। टैक्सेशन सिस्टम का व्यापक अध्ययन किया और इस आधार पर भारत के किसानों को मध्यम वर्ग के लोगों की कानूनी लड़ाई लड़ी इस प्रकार उन्होंने भारतीय लोगों के हुकूक उनके अधिकारों की रक्षा की लंबी लड़ाई भी लड़ी। रहमतुल्ला सयानी का देहांत 4 जून 1902 को हुआ उनके महत्वपूर्ण योगदान में उन्हें इतिहास के पन्नों में जगह मिली हो हमेशा बात करते रहेंगे।

 

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