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500 किलो से अधिक सड़े-गले आम व केले को करवाया नष्ट

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  • सावधान! 100 के 04 किलोग्राम आम आपके लिए बन सकते हैं जानलेवा

पाली, (रॉयल पत्रिका)। ग्रीष्मकालीन विशेष अभियान के तहत “शुद्ध आहार मिलावट पर वार” की कार्यवाही करते हुए पाली जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने आयुक्त खाद्य सुरक्षा औषधि नियंत्रण एच. गुईटे के दिशा-निर्देश पर बड़ी कार्यवाही करते हुए 500 किलो से अधिक सड़े-गले आम व केले को नष्ट करवाया। इस विशेष अभियान के तहत खाद्य कारोबारकर्ताओं को कच्चे फलों को पकाने में प्रयुक्त होने वाले जहरीले रसायन का छिड़काव नहीं करने की हिदायत दी गई। साथ ही फल एवं सब्जी मंडी के होलसेल व्यापारियों को सड़े-गले फलों व सब्जियों को नहीं विक्रय करने के लिए पाबंद किया गया।

सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल के निर्देशानुसार हीटवेव जैसी तेज गर्मी में पेय पदार्थों, जूस व फलों में रसायन का प्रयोग करने वाले खाद्य कारोबारकर्ताओं पर विशेष कानूनी कार्यवाही करने को कहा गया। इस अभियान के तहत श्याम एग्रो फूड्स अम्बे नगर स्थित कोल्ड स्टोरेज सेंटर पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीपसिंह यादव व सुरेश चन्द्र शर्मा, मय टीम ऑपरेटर ओम प्रकाश प्रजापत ने निरीक्षण किया तथा पाया कि कोल्ड स्टोरेज सेंटर में केले को पकाने में प्रयुक्त रसायन एफएसएसएआई द्वारा अधिकृत था।

सावधान! 100 के 04 किलोग्राम आम आपके लिए बन सकते हैं जानलेवा

सुनने के बाद आप हैरत में रह जाएंगे लेकिन यह सच है। ऐसा ही मामला जब सामने आया तब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा अचानक फल एवं सब्जी मंडी में दबिश देकर एक होलसेल व्यापारी के यहां छापा मारा गया। जो आम बाजार में 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम बिकते हैं, वहीं आम फल कैरेट में सड़े-गले मिले। अधिकारियों के पूछने पर खाद्य कारोबारकर्ता ने सौ के 04 किलो देने की बात कह दी। इन सड़े व बदबूदार आमों में कीड़े पड़े मिले। जिस पर कार्यवाही करते हुए 500 से अधिक किलो आम को नष्ट करवाया गया।

इन रसायनों का उपयोग बन सकता है जानलेवा

खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि कैल्सियम कार्बाइड व एसीटिलीन जैसे रसायनों का उपयोग फलों को पकाने में करने पर यह आमजन के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इस विशेष अभियान के तहत जिले भर में सभी जूस सेंटर्स, कोल्ड स्टोरेज सेंटर व फल एवं सब्जी विक्रेताओं के यहां पर कार्यवाही कर अभियान को सफल बनाया जाएगा। अभियान के दो दिनों में ही शहर के विभिन्न जगहों से फलों की रसायन जांच के लिए 16 सैंपल लिए गए जिन्हें जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला में जांच हेतु भेजा गया।

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