तुर्की की वस्तुओं का भारत में बहिष्कार शुरू
भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की मार अब तुर्की पर भी पड़ने लगी है। तुर्की, अज़रबैजान और चीन ने पाकिस्तान का खुलकर साथ दिया। तुर्की ने पाकिस्तान को अति आधुनिक ड्रोन, मिसाइल एवं एंटी मिसाइल सिस्टम दिए, जिनका पाकिस्तान ने भारतीय ठिकानों पर आक्रमण करने में इस्तेमाल किया। तुर्की के ड्रोन के कारण पाकिस्तान भारत का कुछ हद तक मुकाबला कर सका। यही नहीं तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोगान ने पाकिस्तान के पक्ष में स्टेटमेंट भी दिए और खुलकर साथ देने का ऐलान भी किया। तुर्की की इस हरकत से भारत और भारत की जनता बेहद नाराज दिखाई दे रही है। भारत सरकार ने तो आधिकारिक तौर पर तुर्की के साथ व्यापार रोकने की कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन भारत के कुछ व्यापारियों ने तुर्की के साथ आयात निर्यात रोकने और तुर्की देश की बनी वस्तुओं के बहिष्कार के लिए आंदोलन चलाया है। वैसे भारत तुर्की को 6.65 अरब डॉलर का निर्यात करता है और 3.78 अरब डॉलर का आयात करता है। भारत तुर्की व्यापार अधिशेप भारत के पक्ष में है। भारत में तुर्की के प्रति काफी नफरत देखी जा रही है। वैसे यदि भारत तुर्की के बीच आयात निर्यात रुकता है तो इसका नुकसान भारत को ज्यादा होगा, क्योंकि भारत तुर्की की वस्तुओं का निर्यात ज्यादा करता है और आयात कम करता है। भारत वर्तमान में आईडियोलॉजी पर चलने वाला देश बन गया है। आर्थिक रूप से भारत को कितना भी नुकसान हो फिर भी वह संबंध नहीं रखता है। इसका उदाहरण इज़राईल माना जा सकता है। भारत ने इजराईल से अच्छे संबंध कायम किए, जबकि दर्जनों मुस्लिम देश इजराईल से दुश्मनी रखते हैं। इजराईल की बजाय भारत की पूर्ववर्ती सरकारों ने फिलिस्तीन की स्वतंत्रता का समर्थन किया था, लेकिन भारत की वर्तमान सरकार इजराईल का एक तरफा समर्थन करती है और फिलिस्तीन उसकी प्राथमिकता में नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि भारत और तुर्की के संबंधों में दूरियां बढ़ने वाली हैं, क्योंकि तुर्की ने दुश्मन देश पाकिस्तान का एक तरफा समर्थन करके भारत से दुश्मनी मोल ली है। वैसे भारत और तुर्की एक दूसरे के पड़ौसी देश नहीं हैं। इसलिए दोनों के बीच सीमाओं पर युद्ध जैसी गतिविधि नहीं हो सकती है। तुर्की प्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान का साथ देकर भारत से दुश्मनी निकाल सकता है या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ बोल सकता है। तुर्की का पाकिस्तान के प्रति लगाव ऐसे ही दिखाई नहीं दे रहा है, तुर्की पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर भाई-भाई बता रहा है। लेकिन इसके पीछे तुर्की की मंशा कुछ और ही दिखाई दे रही है। तुर्की विश्व में मुस्लिम देशों का खलीफा बनना चाहता है, क्योंकि तुर्की 13वीं से 18वीं सदी तक बड़ा साम्राज्य रह चुका है और अपनी पुरानी बादशाहत कायम करना चाहता है। इसके लिए वह तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्व में शक्तिशाली बनने के लिए किसी देश के पास परमाणु हथियार होना जरूरी है। तुर्की क्योंकि खुद परमाणु हथियार बना नहीं सका है, इसलिए पाकिस्तान से परमाणु तकनीक हासिल करने के लिए तुर्की उसका साथ आगे बढ़कर दे रहा है। पाकिस्तान पर कोई भरोसा नहीं करता कि वह परमाणु हथियारों के प्रयोग के मामले में गंभीर देश है। पाकिस्तान तुर्की को परमाणु तकनीक दे सकता है? तुर्की को एक बार परमाणु बम बनाने की तकनीक मिल जाने के बाद वह अपनी असलियत दिखाने में देर नहीं करेगा। तुर्की का पाकिस्तान को आगे बढ़कर मदद करने के पीछे परमाणु बम बनाने की तकनीक हासिल करने का लक्ष्य दिखाई देता है।
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