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मेहमान नवाज़ी के आदाब

Jaipur

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मेहमानों का इस्तक़बाल करना एक अहम दीन की क़ीमती रिवायत है, जिसे अमल में लाना चाहिए। मेहमाननवाज़ी को इस्लाम में बहुत तवज्जो दी गई है। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “जो शख़्स अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, उसे चाहिए कि अपने मेहमान का इकराम करे।” (बुख़ारी व मुस्लिम)। हालांकि बहुत से लोग इस्लामी तरीक़े से मेहमानों का सही तरीक़े से स्वागत करना नहीं जानते, जबकि ये एक ऐसा तरीका है जिससे हम एक-दूसरे के साथ मोहब्बत, इज़्ज़त और रहमदिली का मुज़ाहिरा कर सकते हैं।

1. मेहमान को सलाम करना या ख़ुशआमदीद कहना

इस्लाम में मेहमान का स्वागत सलाम या ख़ुशआमदीद कहकर करना सबसे पहला अदब है। इससे मेहमान को इज़्ज़त और अहमियत मिलती है। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “जब कोई तुम्हारे घर आए तो उसे सलाम कहना चाहिए। अगर उसे इजाज़त दी जाए तो दाख़िल हो और अगर ना दी जाए तो वापस चला जाए।” (मुस्लिम)

  1. मुस्कराहट के साथ इस्तक़बाल करें

मुस्कराहट एक सादा और मुफ़्त सदक़ा है लेकिन इसका असर बड़ा होता है। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:
“कोई भी नेकी को हल्क़ा मत समझो, चाहे वो अपने भाई से ख़ुश चेहरा दिखाना ही क्यों ना हो।” (मुस्लिम)

  1. महरम की मौजूदगी में मेहमानों को तशरीफ़ लाने दें

अगर मेहमान विपरीत लिंग से हो और महरम ना हो, तो ऐसे में महरम की मौजूदगी ज़रूरी है। रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया: “किसी मर्द और औरत को अकेले नहीं होना चाहिए, जब तक कि उनका महरम साथ न हो।” (बुख़ारी व मुस्लिम)

  1. साफ़-सुथरे और शरीफ़ाना लिबास पहनें

अच्छा लिबास पहनना इस बात की अलामत है कि आप मेहमान की क़द्र करते हैं। रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया: “अल्लाह ख़ूबसूरत है और ख़ूबसूरती को पसंद करता है।” (मुस्लिम)

  1. मेहमान को आराम से बैठने की जगह दें

मेहमान को तसल्ली से बैठाना उसकी तवज्जो और इज़्ज़त का सुबूत है। रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया: “जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, वो अपने मेहमान को अच्छी जगह दे।” (बुख़ारी व मुस्लिम)

  1. सफ़ाई और तरतीब का ख़याल रखें

घर की सफ़ाई और सलीक़ा मेहमान को इत्मिनान और सुकून देता है। रसूलुल्लाह (ﷺ) सफ़ाई पसंद फ़ित्रत के हामी थे।

  1. नर्मी और तहज़ीब से पेश आएं

अच्छे अख़लाक़ वाला इंसान हमेशा मेहमान से तहज़ीब और लिहाज़ के साथ पेश आता है। रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया:
“तुम में सबसे बेहतर वो है, जिसका अख़लाक़ बेहतर हो।“ (बुख़ारी व मुस्लिम)

  1. मेहमान की प्राइवसी का एहतिराम करें

कभी भी मेहमान की निज़ी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी ना करें, और उसकी इजाज़त के बग़ैर कोई राज़ ज़ाहिर ना करें।
रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया: “जो अपने भाई के राज़ को छुपाए, अल्लाह उसके राज़ को छुपाएगा।” (अहमद)

  1. मेहमान की अच्छी ख़िदमत करें

मेज़बान का फ़र्ज़ है कि वो मेहमान को खाना वग़ैरह दे और उसकी दिल से ख़िदमत करे। रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया:
“जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, वो अपने मेहमान को खाना खिलाए।”(बुख़ारी व मुस्लिम)

  1. मेहमान को घर से रुख़्सत करते वक़्त साथ चलें

मेहमान को घर से बाहर तक छोड़ना एक एहतराम की अलामत है। रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया: “जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, वो अपने मेहमान के साथ चले।” (बुख़ारी व मुस्लिम)

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