माँ की बददुआ और बेटे की इबादत
मुस्लिम शरीफ जिल्द सानी सफा नं 313 पर एक हदीस है, जिसका हासिल यह है कि हजरत अबू हुरेरा रजि.अ.रिवायत नकल करते हैं कि अल्लाह के रसूल स.अ.व ने फरमाया कि बनी इसराईल में एक जरीह नामी बुजुर्ग थे। एक मर्तबा वोह अपने इबादत खाने में नमाज पढ़ रहे थे, अचानक उनकी वालिदा आयी और पुकारने लगी ए जरीह, ए जरीह, मगर चूंकि जरीह, नमाज में मसरूफ थे, इसलिये कोई जवाब नहीं दिया, मॉ वापस चली गयी, फिर दूसरे और तीसरे रोज भी यही मामला पेश आया, माँ ने ए जरीह ए जरीह कह कर पुकारा जवाब नहीं मिला, तो माँ ने बददुआ की अल्लाह जब तक यह जानिया औरत का मुंह ना देखले ना मरे। बहरहाल रफ्ता-रफ्ता जरीह का
इबादत में बहुत चर्चा हो गया कि बड़़े आबिद है, जाहिद हैं मुत्तकी और परहेजगार है, चुनाचे एक आवारा हसीन तरीन औरत जरीह के पास इबादत खाने में पहुंची और जरीह नामी बुजुर्ग को अपनी खुवाहिश के जाल में फंसाना चाहा, बुजुर्ग जरीह तो कब्जे में ना आया मगर एक चरवाहा इबादत खाने में रहता था उसको फंसा लिया, और उससे बुरा काम (ज़़िना) कर लिया, चुनान्चे वह औरत हामिला हो गई, और उसने कुच्छ दिनो के बाद एक लड़का जना, तो उसने लोगो से कहा कि यह लड़का जरीह बुजुर्ग से है, मखलूक (लोग) जमा हो गयी, आनन फानन में उन्होंने इबादतखाने को गिरा दिया और जरीह नामी बुजुर्ग को खूब जदोकोब किया, खूब मारा, हजरत जरीह समझ गये कि यह मेरी वालिदा की बददुआ का असर है, मगर यह भी ख्याल करते थे कि मैं नमाज में मशगूल था इस वजह से बारी ता आला मुझे ज़रूर खुलासी और निजात देंगे। बहरहाल जब लोगो की भीड़ इकट्ठी हो गयी, मारपीट होती रही, खानकाह को तहस नहस कर दिया गया तो जरीह ने जुरअत और हिम्मत के साथ लोगो के मजमें से खिताब या, और कहा कि क्या बात है? क्यूँ जरीह को मार रहे हो, मेरी क्या गलती है, तो लोगो ने कहा तूने इस औरत से जिना किया है, जिसके नतीजे में लड़का पैदा हुआ है, जरीह ने कहा वोह लड़का कहां है उसको लाओ, बहरहाल उस बच्चे को लाया गया, जरीह ने दो रकअत नमाज पढ़ कर उस बच्चे के पेट पर उगंली रखकर कहा बतला तेरा बाप कौन है ? बच्चा बोला कि फलाँ चरवाहा है, तमाम लोग नादिम व शर्मिंदा हुये, और बकमाले अदब जरीह नामी बुजुर्ग को कहने लगे कि अगर आप फरमाये तो आपका इबादतखाना सोने का बनवादे, आप (जरीह) ने कहा नही वैसा ही मिट्टी का बनवादो। बहरहाल जरीह बुजुर्ग माँ की बात ना सुनने की जहमत आखों से देख ली, इसलिये मेरे अजीज़़ो ! माँ की बात का फौरन जवाब देना चाहिये नफिल नमाज पढ़ रहे हो, माँ ज्यादा परेशान नजर आरही है तो नफिल नमाज की नियत तोड़ कर जवाब दे दो वोह नफिल दुबारा अदा करलो, हां फर्ज नमाज है तो पूरी करके वालिदा से मिलो उसके हुक्म को सुनो और उसकी फरमॉबरदारी करो। माँ बाप की इताअत बहुत जरूरी है, माँ के पैरो तले जन्नत है। और बाप जन्नत का दारोगा है, हमें हर हाल में दोनों माली व बदनी खिदमत करनी चाहिए। अल्लाह हम सबको वालदेन की खिदमत दिलो जान से करने की तौफीक अता करमाये, आमीन !
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