जालिम का कोई मजहब नहीं
हैदर अली अंसारी
हमारे मुल्क में जन्नत कहलाने वाले कश्मीर के पहलगाम मे घटित आतंकी घटना से आज पूरा मुल्क दुखी है, परेशान है आक्रोशित है। पूरा कश्मीर अपनी नम आँखों से शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं वयक्त कर रहा है। मोदी सरकार द्वारा इस आतंकी घटना के बाद लिए गए सभी कडे फैसलों की सराहना की जानी चाहिए और मैं हुकुमत की जानिब से लिए गए सभी फैसलों पर अपनी खुशी वयक्त करता हूं। मीडिया मे चल रही न्यूज और डिबेट देख कर यहां हमे यह भी याद रखना चाहिए कि उन आतंकवादियो ने हमारे लोगों को मारते हुए मजहब पूछा, कलमा पढ़ने के लिए कहा और यह मजहब पूछ कर गोली मार दी गई और उन औरतों को छोड़ दिया गया जिसके पीछे उनका जो मकसद नजर आता है। वो साफ तौर पर समझा जा सकता है कि उनका बेगुनाह निहत्थे लोगों के कत्ल के साथ साथ हमारे मुल्क के अमन, भाइचारे के माहौल को खत्म करना है। कश्मीर की शांति को खत्म करना है, इस मुल्क मे कश्मीरी अवाम के प्रति, मजहब ए इस्लाम के प्रति नफरत फैलाना है। लेकिन उनकी इन साज़िशों को कश्मीर की अवाम ने कामयाब नहीं होने दिया। हमले मे टूरिस्ट्स को बचाने के लिए सैयद आदिल हुसैन अपनी जान का नजराना पेश कर देता है और टूरिस्ट्स की जान बचाते हुए शहीद हो जाता है। ठीक उसी तरह छत्तीसगढ़ के एक कपड़ा व्यापारी नजाकत अली द्वारा 11 लोगों की जान बचाई जाती है। ठीक इसी तरह एक कश्मीरी मुस्लिम ड्राइवर आदिल द्वारा भी लोगों की जान बचाने की जद्दोजहद की जाती है। यह सब वीडियो जिनकी घटना मे जान बचाई गई उनके द्वारा जारी हुए और सोशल मीडिया पर जारी हुए। ठीक इसी तरह पहलगाम और कश्मीर की मस्जिदों को अवाम की मदद के लिए खोल दिया। मस्जिदों से घटना की कड़ी मजम्मत का एलान हुआ, वहाँ की अवाम की जानिब से केंडल मार्च निकाला गया। यह सब साफ तौर पर दिखलाती है कि पूरे मुल्क का मुसलमान इस घटना की कड़ी मजम्मत करता है, और अपनी नम आँखों से शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना वयक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। लेकिन बावजूद इन सब के जब कुछ मीडिया चैनल द्वारा किसी खास मजहब के लोगों को टार्गेट करते हुए एक उसके मानने वाले सभी लोगों के प्रति नफरत बढ़ाने, मजहब को बदनाम करने का नेरेटिव चलाया जाता है तो दिल दुखी भी होता है। मजहब ए इस्लाम की तालीम मे साफ तौर पर मुसलमानों का यह ईमान है कि जिसने किसी एक बेगुनाह का कत्ल किया। उसने पूरी इंसानियत का कत्ल किया और जिसने किसी एक बेगुनाह को बचाया उसने पूरी इंसानियत को बचाया, जिस मजहब मे जालिम के खिलाफ इसके जुल्म को रोकने का साफ तौर पर हुक्म दिया गया हो, वहाँ आप कुछ घटनाओ और कुछ जालिमों को आधार बना कर पूरे मजहब और उसके मानने वालों को कठघरे मे खड़ा नहीं कर सकते हैं। अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो यह याद रखे कि आप उन आतंकवादियों के मकसद को पूरा कर रहे हैं जिसके लिए उन्होंने घटना को अंजाम दिया और जान बुझ कर इस तरह का संदेश दिया, मजहब पूछ कर कत्ल किया। जालिम का कोई मजहब नहीं होता है जो इंसान निहत्थे, बेगुनाह लोगों पर गोलियां बरसाता है वो तो मेरी निगाह मे इंसान भी नहीं है, मैं उसे शैतान कहूँगा और शैतान का कोई मजहब नहीं होता है। आपको यहां यह भी याद रखना चाहिए कि आज कश्मीर की अवाम सबसे ज्यादा दुखी हैं उनके पास अपनी जीविका चलाने, अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए उनका रोजगार पूरी तरह से टूरिज्म पर टिका हुआ है। आज पूरी कश्मीर घाटी मौन है, सुनसान है, शांत है दुखी हैं, परेशान है। वहाँ की अवाम पूरी तरह से शांति चाहती है और पूरी आवाम मुल्क हिन्दुस्तान के साथ खड़ी है। और यह सब चीजे नापाक मुल्क पाकिस्तान को, वहाँ के दहशतगर्द लोगों को हजम नहीं हो रही है। इसीलिए हमे भी कश्मीर की अवाम के प्रति अपना नजरिया बदलना पड़ेगा हमे खुद अपनी जन्नत को बचाना है। उसे बर्बाद नहीं होने देना है। जब सोनमर्ग मे हज़ारों लोग फंसे हुए थे तब यही कश्मीरी लोग अपने घरों, मस्जिदों, दरगाहों, और अपने दिलों के दरवाजे खोल कर अपने मुल्क की अवाम के साथ खड़े हो जाते हैं। पूरे मुल्क मे हर मुस्लिम नौजवान ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए से इस घटना की मजम्मत की है। पूरा मुल्क अपनी नम आँखों से अपने शहीद परिवारों के प्रति अपना दुख वयक्त कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। हर जालिम को अपने जुल्म की सजा भुगतनी है, इस दुनिया मे भी और आखिरत मे भी, खुदा की अदालत मे भी वो बच नहीं सकते हैं। दहशतगर्द लोगों को जितनी सख्त सजा दे सकते हैं, देना चाहिए और पूरी दुनिया से आंतक का, दहशत गर्दी का खात्मा होना चाहिए। मैं अपनी जानिब से अपनी नम आँखों के साथ देश के हर नागरिक जो शहीद हुए हैं उनके प्रति, उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर, ईश्वर से कामना करता हूं कि ईश्वर आपको इस मुश्किल घड़ी मे इस बड़े दुख को, दर्द को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
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