महेश जोशी की गिरफ्तारी से गरमाई सियासत, गहलोत बोले– ये राजनीतिक प्रतिशोध है
जयपुर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) से जुड़े 980 करोड़ रुपए की अनियमतता के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को लम्बी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) विशेष न्यायालय के जज सुनील रणवाह ने जोशी को चार दिन के रिमांड पर ईडी को सौंप दिया। 28 अप्रेल को फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस दौरान जोशी को घर का खाना खाने व दवाइयां लेने की अनुमति होगी और अधिक तबियत खराब होने पर एक दिन एक घंटे के लिए पत्नी से मिलने भी जा सकेंगे। गिरफ्तारी के बाद पूर्व मंत्री महेश जोशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुझे देश के कानून पर पूरा भरोसा है। मैंने जल जीवन मिशन मामले में कोई गड़बड़ी नहीं की है। किसी से कोई पैसा नहीं लिया है। जिन लोगों के खिलाफ मैंने कार्रवाई की और उन्हें ब्लैकलिस्टेड किया, उन्हीं लोगों के बयानों के आधार पर मुझे ईडी ने गिरफ्तार किया है। मुझे कानून पर पूरा भरोसा है। उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा।
इधर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महेश जोशी की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय पर की गई है जब उनकी पत्नी करीब 15 दिन से जयपुर के एक अस्पताल में बेहोशी की हालत में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। उनकी इच्छा थी कि इस मुश्किल परिस्थिति से निकलने के बाद ईडी को बयान दें। यह पूरा मामला केंद्र सरकार की ‘हर घर तक नल से जल’ पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन से जुड़ा है। जिसमें इरकॉन कंपनी के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर मैसर्स श्रीगणपति ट्यूबवैल कंपनी और मैसर्स श्रीश्याम ट्यूबवैल कंपनी ने टेंडर हासिल किए थे। ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने 2021 में जल जीवन मिशन के तहत टेंडर लिए थे। श्रीगणपति ट्यूबवैल कंपनी ने फर्जी प्रमाण पत्रों से करीब 859 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे। जबकि श्रीश्याम ट्यूबवैल कंपनी ने 120।25 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे। इस मामले में सबसे पहले एसीबी ने जांच शुरू की थी। एसीबी के एक्शन के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने केस दर्ज कर पूर्व मंत्री महेश जोशी, उनके नजदीकी संजय बड़ाया व अन्य के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस मामले में सीबीआई ने भी केस दर्ज किया था।
ऐसे समझें जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले की पूरी कहानी
जल जीवन मिशन घोटाले की कहानी अगस्त 2021 से शुरू होती है, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले की पहली परत खोली। इसी के साथ यह खुलासा हुआ कि राजस्थान में ‘हर घर जल’ पहुंचाने की इस महत्वाकांक्षी योजना में भारी गड़बड़ियां हो रही हैं। ACB ने तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी समेत 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जांच में सामने आया कि गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल नाम की दो कंपनियों ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल कर लिए। इनमें से कुछ टेंडर 859 करोड़ रुपये तक के थे। आरोप है कि महेश जोशी के नजदीकी संजय बड़ाया ने इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। बाद में उन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया, हालांकि अब वे जमानत पर हैं। इसी मामले में जोशी के वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा पर भी गड़बड़ियों की स्कीम तैयार करने और पैसों के लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगा। इसके साथ ही मुख्य अभियंता आरके मीना पर भी नियमों की अनदेखी कर कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप है। अगस्त 2023 में ACB को सूचना मिली कि कुछ अफसर और ठेकेदार मिलकर रिश्वतखोरी में जुटे हुए हैं। इसी सिलसिले में 7 अगस्त को जयपुर के सिंधी कैंप इलाके के एक होटल में ACB ने बड़ी कार्रवाई की। यहां PHED के इंजीनियर मायालाल सैनी और प्रदीप को ठेकेदार पदम चंद जैन और एक कंपनी सुपरवाइजर मलकेत सिंह के साथ रंगे हाथों 2.90 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। इससे पहले ही ईडी, पदमचंद जैन, पीयूष जैन, महेश मित्तल और संजय बड़ाया जैसे नामों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी थी। हालांकि पूछताछ के बाद ये सभी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। अब जब ईडी ने महेश जोशी को भी गिरफ्तार कर लिया है, तो यह मामला एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। ऐसे समय में जबकि जोशी की पत्नी अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही हैं, इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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