दुआ की कुबुलियत
दुआ की कुबुलियत के लिए नमाज की पबंदी और अकीदे की दुरुस्तगी जरूरी है। अल्लाह तआला का कुर्ब दुआ करने से हासिल होता है। दुआओ से तकदीरें बदल जाती है और अल्लाह तआला इसांन को एक मुकाम से दूसरे मुकाम तक पहुंचा देता है। दुआ मोमीन का हथियार है और शैतान से बचाता है। दुआ इबादत की जान है और खुदा से मुलाकात का जरीया है। दुआ करने के लिए आगे पीछे दुरूद पढऩा लाजिमी है। यह एक ऐसी इबादत है जो समुद्री तूफानो को रोक देती है और दरियाओ के रूख को मोड़ देती है। दुआ बदंगी जो बकशीश के दरवाजे खोल देती है। और मुआफी का क्लम फैर देती है खुशु व खुजु अजीज व इन्केसारी और खुलुस के साथ मॉगी हुई दुआ कभी बारगाह इलाही से रद्द नही की जाती। हदीसं में है के दुआ के अलावा सदका भी बुराई के 70 दरवाजे बंद कर देता है। सदका कबर की गरमी को दूर करता है और तकब्बुर और फकीरी को हटा देता है। अल्लाह तआला इसकी आमदनी में खैर व बरकत अता करता है। अल्लाह की जात व सिफात में किसी को मिलाना शिर्क कहलाता है। हर मुराद पूरी करने वाला वह वहादाहुला शरीक कलाहु है। इसलिए सिर्फ अल्लाह तआला से ही मांगो मगर सच्चे अकीदे के साथ क्योंकि यही सच्चे मोमीन की निशानी है। शिर्क इसांन के अमाल को र्बबाद कर देता है चाहे वह कितना ही नेक इबादत गुजार या तहजुद गुजार ही क्यो ना हो। मुशरीक की जुबान सेनिकली हुई बात की कोई तासीर नही रखती। जब इसांन अपने अमाल में शिर्क को जगह देकर सीधी राह और इस्तेकामात से हट जाते है तो वह अल्लाह तआला की तरफ से किसी मदद और सहारे के मुस्तहिक नही रहते और अल्लाह तआला की नजर ऐ इनायत से मेहरूम रहते है। लिहाजा हमें अपने दामन को शिर्क के काटो से हमेशा दुर रखना चाहिए। गैर अल्लाह को पुकारना गुमराही का सबब है नेकी का बदला नेकी से देना अखलाक हसना की बेहतरीन मिसाल है। सब्र करना दिल की हिदायत और रोशनी का जरिया बनता है। जो शख्स अल्लाह तआला का वास्ता देकर पनाह तलब करता है तो इसको पनाह दी जाती है। आज कल लोग जहालत की तरफ तेजी से बढ़ कर अपनी अमली जिन्दगी में शिर्क को जगह देकर अपने इमान की रोशनी को गुल कर रहे है। अल्लाह तआला के साथ दूसरो कों शिर्क करके अपने अमाल में गिलाजत के अनबर लगा रहे है। अल्लाह तआला की तरफ निगाह रखो वह तुम्हें भी अपनी निगाह में रखेगा। अगर तुम इसे अपनी निगाह में रखोगे तो इसे अपने सामने पाएंगें जब भी तुम कुछ मांगो अपने अल्लाह ही से मांगो और यकीन कर लो के अगर दुनिया में सब लोग जमा हो कर तुम्हें कुछ नफहा या नुकसान पहुंचाना चाहे तो हरगीज नही पहुचा सकते। अल्लाह के सिवा हर इला और हर मौला बालिक है हम को यह जैब नही देता के गुलाम किसी और के हो और हुकुम किसी और का माने। बंदे किसी और के हो और बदंगी किसी और की करें। खाऐ किसी और का और गुन किसी और के गाऐ। जो खुद हम जैसी मखलूक हो वह हमें क्या दे सकता है और दुख में मदद करने वाला और कुवत वाला वह अकेला जबरदस्त है। जो शख्स खुदा से नही डरता वह लोगो के गेज गजब का निशाना बन पाता है। और खुद को बेबस मजबूर पाता है। जिस पर नसीहत असर नही करे इसका दिल इमान से खाली है। जो शख्स तकदीर पर इमान नही रखता वह इमान के मजे से बिल्कुल मेहरूम है। तुम में बेहतरीन वो लोग है जिन को देख कर अल्लाह तआला की याद ताजा होती है। इनके नेक अमाल को देख कर अपने लिऐ आखिरत की रूगबद पैदा करे। हर मांगी दुआ में यकीन का होना लाजमी है क्योकि अल्लाह कोई अमलऔर आपकी आँखों से निकला आसु जाये नही करता है। दिल से यकीन करे के हमने जो मांगा के वह अल्लाह जरूर देगा इंसान का यकीन ऐसा हो जैसे समुद्र में खड़़े है और अल्लाह रास्ता निकालेगा। बस नियत पुखता रखे क्योकि अल्लाह नियत पर फैसला करता है और कुन फ्याकुन का नजारा दिखाता है। इसलिए कभी मायुस नही होना चाहिए अल्लाह की जात से क्योकि अल्लाह यकीन करने वालो से मुहब्बत करता है और अल्लाह फरमाता है मेरे से मांगों में तुम्हे दूंगा यह मेरा वादा है लेकिन अल्लाह इंसान को आजमाता है उसकी सबसे महबूब चीज से और सब्र दुआ के जरियें इसांन को उसकी मंजिल तक पहुंचाता है। अगर इंसान को उसकी मंजिल मिलने में वक्त लग रहा है तो यकीन करे अल्लाह कुछ इस तरह की परेशानी देता है जिसे देखकर इसांन को लगता है के उसकी मंजिल मिलना मुश्किल ही नही बल्के ना मुमकिन है लेकिन इंसान भुल जाता है के अल्लाह के लिए कुछ भी ना मुमकिन नही है। अल्लाह सिर्फ इंसान का पुख्ता इरादा और नियत देखता है इसलिए नमाज सब्र के जरिये अल्लाह से मदद मांगें और यकीन करे वह जरूर देगा। मेरा यकीन यह है के अगर कोई मेरे से यह कहे के जमीन आसमान अपनी जगह से हिल गए है तो में यकीन कर लूगा लेकिन कोई यह कहे कि अल्लाह से मैने मांगा और उसने नही दिया तो में यकीन नही करूंगा। यही कहूगा यह हो नही सकता क्योकि अल्लाह से मांगो वह जरूर देगा।
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