राजस्थान पुलिस के जांबाज़ योद्धा थे फूल मोहम्मद
- -17 मार्च पुण्य तिथि
राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त हुए फूल मुहम्मद 1997 में इंस्पेक्टर बने। मूलत: सीकर जिले के खिरवा गांव के निवासी फूल मोहम्मद का परिवार जयपुर के झोटवाड़़ा थाना इलाके में जोशी मार्ग पर रहता है। उनके परिवार में पत्नी और छह बच्चे हैं। सवाई माधोपुर के मान टाउन थाना क्षेत्र के सूरवाल गांव में 17 मार्च 2011 को लोग मृतका दाखा देवी के हत्यारो कों गिरफ्तार करने और पीडि़त के परिजनों को मुआवजे की मांग कर रहे थे। इसी दौरान राजेश मीणा व बनवारी बोतलों में पेट्ररोल लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गए और आत्महत्या की धमकी देने लगे। बनवारी को लोगो नें नीचे उतार लिया लेकिन राजेश पेट्ररोल से खुद को आग लगाकर टंकी से नीचे कूद गया। इससे मौके पर जमा भीड़ आक्रोशित हो गई और वहां मौजूद पुलिस जाप्ते को ही घेरकर दो पुलिस जीपो व बाइक को आग लगा दी। एक जीप में सवार मानटाउन थाना प्रभारी फूल मुहम्मद खान (42) को जि़न्दा जला दिया गया। पुलिस बल फूल मुहम्मद को जलता छोड़कर भाग खड़़ा हुआ। शाम करीब साढ़़े छह बजे तत्कालीन एसपी डॉ. विष्णुकांत खुद भारी संख्या में पुलिस जाप्ता लेकर मौके पर पहुंचे और हवाई फायर कर कस्बे में घुसने के बाद जीप से जला हुआ शव बरामद किया। इस जांबाज़ पुलिस अधिकारी को जि़न्दा जला दिए जाने के बाद भी पुलिस वालो की नींद नहीं टूटी। वह बेइंतिहा लापरवाही का बार – बार सबूत देती रही। उनके शव को दो सिपाही जीप में रखकर ले गये , लेकिन जनाज़़े के समय सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नही था और नही पुलिस का कोई अधिकारी ही मौजूद था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक हाथ और एक पांव गुम होना बताया गया था, लेकिन पुलिस की ओर से इन्हें तलाशने की कोशिश नहीं की गई। मुकदमा दर्ज होने के बाद तीन दिन तक पुलिस अधिकारी मौक़़े का मुआयना करने नही गए, नक्शा मौक़़ा नही बनाया, घटना स्थल का सूक्ष्म निरीक्षण नहीं किया। तीन दिन के बाद पत्थरो के नीचे फूल मोहम्मद का एक हाथ और एक पांव बरामद किया गया। शव को पहले ही दफ्न कर दिया गया था अब मिले अन्य अंगो को भी दफ्न किया गया। इस मामले के प्रति पुलिस की लापरवाही के चलते पूरा हत्याकांड बिना किसी समुचित जांच और कार्रवाई के एक तरह से खत्म हो गया और साम्प्रदायिकता एवं पक्षपात का नया अध्याय रच गया। हमें नाज़ है इस बहादुर पुलिस अधिकारी पर, जिसने देश और समाज की खातिर जि़न्दा जल जाना पसंद किया। कर्तव्य पथ पर अडिग रहने वाले इस जाँबाज योद्धा को सलाम
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