रमज़ान का इस्तेक़बाल कैसे करें?
रमज़ान में वह बंदा क़ुर्ब-ए-इलाही पाकर सिबग़तुल्लाह में रंग जाता है। जिस तरह अल्लाह तआला ने अपनी मख़लूक़ात में से कुछ को कुछ पर फ़ज़ीलत दी, वैसे ही दिनों में भी कुछ को कुछ पर, जगहों में भी कुछ को कुछ पर और रातों में अफ़ज़ल रात लैलतुल क़द्र को बनाया। महीनों में भी कुछ को कुछ पर फ़ज़ीलत दी और रमज़ान को तमाम महीनों में अफ़ज़ल क़रार दिया।
रसूल-ए-अकरम ﷺ रजब के शुरू होते ही यह दुआ फ़रमाया करते थे:
اللهم بارک لنا في رجب و شعبان وبلغنا رمضان
(ऐ अल्लाह, हमारे लिए रजब और शाबान में बरकत अता फ़रमा और हमें रमज़ान तक पहुंचा दे)।
यह बहुत मुबारक और क़ीमती दुआ है, क्योंकि हम सब अल्लाह की रहमत और बरकतों के मोहताज हैं। रमज़ान को पाने के लिए ईमान की सलामती और क़ूवत ज़रूरी है, जो इस दुआ की कसरत से नसीब हो सकती है।
रमज़ान की बशारत
हज़रत उबादा फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर ﷺ ने रमज़ान के क़रीब फ़रमाया: “रमज़ान का मुबारक महीना आ गया है, जो बहुत बड़ी बरकत वाला है। अल्लाह तआला इस महीने में तुम्हारी तरफ़ मुतवज्जेह होते हैं, अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमाते हैं, गुनाहों को माफ़ करते हैं, दुआओं को क़बूल करते हैं, और मलाइका से तुम्हारा ज़िक्र फ़ख़्र के साथ करते हैं। बस अल्लाह को अपनी नेकी दिखाओ। बदनसीब है वह शख़्स जो इस महीने में भी अल्लाह की रहमत से महरूम रह जाए।” (तबरानी)
रमज़ान की ख़ुसूसियात
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि रमज़ान की पाँच ख़ुसूसियात ऐसी हैं जो सिर्फ़ इस उम्मत को दी गईं, पहली उम्मतों को नहीं। पहली यह कि रोज़ेदार के मुंह की बू अल्लाह के नज़दीक़ मिश्क़ से ज़्यादा पसंदीदा है। दूसरी यह कि दरिया की मछलियां तक रोज़ेदार के लिए दुआ करती हैं। तीसरी यह कि जन्नत हर दिन रोज़ेदारों के लिए सजाई जाती है और अल्लाह फ़रमाते हैं कि क़रीब है कि मेरे नेक बंदे दुनिया की मुश्किलों को सहन करके तेरी तरफ़ आएं। चौथी ख़ुसूसियत यह है कि सरकश शैतानों को क़ैद कर दिया जाता है, ताकि वो लोगों को बहकाने में कामयाब न हों। पांचवीं और सबसे बड़ी ख़ुसूसियत यह है कि रमज़ान की आख़िरी रात में तमाम रोज़ेदारों की मग़फ़िरत कर दी जाती है।
रमज़ान का इस्तेक़बाल कैसे करें?
हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ि. फ़रमाते हैं कि नबी-ए-करीम ﷺ ने शाबान की आख़िरी तारीख़ को हमें ख़ुत्बा दिया और फ़रमाया कि तुम्हारे ऊपर एक बहुत बड़ा और मुबारक महीना आ रहा है। इसमें एक रात (लैलतुल क़द्र) है, जो हज़ार महीनों से बेहतर है। अल्लाह ने इसके रोज़े को फ़र्ज़ किया और इसकी रात के क़ियाम (तरावीह) को नफ़्ल बनाया। जो इस महीने में एक नेकी करेगा, वह गैर-रमज़ान में एक फ़र्ज़ अदा करने के बराबर होगी। और जो एक फ़र्ज़ अदा करेगा, उसे गैर-रमज़ान के सत्तर फ़र्ज़ का सवाब मिलेगा।
रमज़ान में इख़लास और बख़्शिश की दुआ
रमज़ान को महज़ एक रस्म न समझें, बल्कि इस मुबारक मेहमान की ख़ुशी से इस्तेक़बाल करें। जिस तरह एक मेहमान के आने पर घर को साफ़ किया जाता है, उसी तरह अपने दिलों को हर तरह की बुराई से पाक करें। अल्लाह, उसके बंदों और ख़ासकर अपने माँ-बाप को राज़ी करें। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि रमज़ान का पहला हिस्सा रहमत, दूसरा मग़फ़िरत और तीसरा जहन्नम से निजात का ज़रिया है। जो शख़्स इस महीने में किसी रोज़ेदार को इफ़्तार कराएगा, उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाएंगे और जहन्नम से आज़ादी नसीब होगी। सहाबा ने अर्ज़ किया कि, “या रसूलुल्लाह, हम सबको रोज़ेदार को खिलाने की ताक़त नहीं!” इस पर आप ﷺ ने फ़रमाया कि यह सवाब सिर्फ़ खाने से नहीं, बल्कि अगर कोई एक खजूर या पानी का घूंट भी किसी रोज़ेदार को पिलाए, तब भी यह सवाब मिलेगा।
रमज़ान में दुआओं की क़ुबूलियत
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि तीन लोगों की दुआ कभी नामंज़ूर नहीं होती। पहली रोज़ेदार की इफ़्तार के वक़्त की दुआ, दूसरी इंसाफ़ करने वाले हाकिम की दुआ और तीसरी मज़लूम की दुआ, जिसे अल्लाह फ़रिश्तों से ऊपर उठा लेते हैं और कहते हैं कि मैं तेरी मदद ज़रूर करूंगा, चाहे देर क्यों न हो।
रमज़ान में अपनी हालत सुधारें
रमज़ान इमान को नया जोश देने वाला महीना है। जिस तरह एक नेज़े की धार को पत्थर से तेज़ किया जाता है, वैसे ही रमज़ान हमारे दिलों को गुनाहों से पाक करता है। पूरे साल जो इंसान गुनाहों में डूबा रहता है, रमज़ान उसके ज़ाहिर और बातिन को संवार देता है। इसलिए इस मुबारक महीने का इस्तेक़बाल करें। हर तरह की रंजिशों को ख़त्म करें, अल्लाह से मग़फ़िरत मांगे और तौबा करें। नमाज़ों में पाबंदी करें, ग़रीबों और यतीमों की मदद करें, दुआओं की कसरत करें और ग़लत कामों से तौबा करें और नेक रास्ते पर चलने का पक्का इरादा करें। रमज़ान वह मेहमान है, जो साल में सिर्फ़ एक बार आता है। यह हमारे लिए अल्लाह की रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नम से निजात का पैग़ाम लाता है। इसका सही इस्तेक़बाल करें, ताकि यह हमारे लिए आख़िरत में नजात का ज़रिया बने।
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