वरुण सागर में लगेगी भगवान झूलेलाल की मूर्ति एवं बनेगा घाट : देवनानी
—फॉयसागर का नाम बदलकर वरूण सागर करने पर सिंधी समाज व संगठनों ने किया विधानसभा अध्यक्ष का सम्मान
अजमेर, (रॉयल पत्रिका)। अजमेर में अंग्रेजी गुलामी की मानसिकता के प्रतीक फॉयसागर झील का नाम बदलकर वरूण सागर करने पर सिंधी समाज, अन्य समुदायों एवं दर्जनों संगठनों ने रविवार शाम वरूण सागर झील पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सम्मान किया। इस अवसर पर देवनानी ने घोषणा की कि वरूण सागर झील में जन आराध्य भगवान झूलेलाल की मूर्ति एवं आमजन व सिंधी समाज की पूजा अर्चना के लिए घाट का निर्माण करवाया जाएगा। बड़ी संख्या में संतों एवं सिंधी समाज से जुड़ी संस्थाओं ने समारोह में भाग लिया। विश्व के अनेक हिस्सों से सिंधी समाज के लोगों व संगठनों ने भी बधाई प्रेषित की। वरूण सागर झील पर रविवार शाम सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने घोषणा की कि वरुणसागर में भगवान झूलेलाल की एक भव्य एवं विशालकाय मूर्ति स्थापित की जाएगी। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए घाट का निर्माण भी करवाया जाएगा। सिंधी समाज द्वारा अपनी धार्मिक परंपराओं के तहत चालिहो उत्सव की प्रथा को और अधिक सुगम बनाने के लिए यह घाट सहायक सिद्ध होंगे। चेटीचंड तक घाट का निर्माण कर समाज को समर्पित कर दिया जाएगा। सिंधी समाज सिंध से विभाजन का दंश सहकर विस्थापित हुए। वरुण सागर समाज को एक नई पहचान देगा। देवनानी ने कहा कि फॉयसागर को गुलामी के प्रतीक से मुक्त कर वरुणसागर नाम देना एक ऎतिहासिक निर्णय है। यह संतो के आशीर्वाद से सनातन धर्म की विजय है ।इससे समाज को अपनी आस्था और परंपराओं को संरक्षित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि भगवान झूलेलाल केवल सिंधी समाज के ही नहीं बल्कि सभी समुदायों के आराध्य हैं और उनकी मूर्ति स्थापित होने से सांस्कृतिक विरासत को और अधिक सशक्त किया जाएगा। यह निर्णय न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करेगा बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। स्मार्ट सिटी अजमेर को पर्यटन का केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए अन्य प्रयास भी किया जा रहे हैं इसमें अजमेर के प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य सहित अन्य पहल शुरू की गई है। सबके सहयोग से श्रेष्ठ अजमेर का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी अजमेर में 2 करोड़ रूपए की लागत से महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में सिन्धु शोध पीठ स्थापित की गई है। इसी तरह शिक्षा मंत्री के रूप में शहीद हेमू कालानी, दाहर सेन, संत कंवर राम, संत टेऊ राम व संत भगवान चन्द्र के पाठ पाठ्यक्रम में शामिल किए गए।
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