उर्दू शिक्षकों के साथ भेदभाव का मामला ?
जयपुर के 9 स्कूल काउंसलिंग से बाहर
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान में द्वितीय श्रेणी उर्दू शिक्षकों की प्राध्यापक पद पर पदोन्नति के लिए हाल ही में काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इस प्रक्रिया में जयपुर के 9 विद्यालयों को शामिल नहीं किया गया। इससे उर्दू शिक्षकों में असंतोष फैल गया है, क्योंकि इन स्कूलों में सैकड़ों छात्र उर्दू विषय पढ़ रहे हैं। अन्य विषयों के शिक्षकों को जयपुर सहित प्रमुख शहरों में नियुक्ति के विकल्प मिले हैं, लेकिन उर्दू विषय के पद केवल जोधपुर और दूरदराज के इलाकों में ही उपलब्ध कराए गए। इस भेदभावपूर्ण रवैये से नाराज उर्दू शिक्षकों ने सरकार से इस मामले में सुधार की मांग की है। रकमा के प्रदेशाध्यक्ष अतीक अहमद ने बताया कि जयपुर में उर्दू विषय के 9 पद वर्षों से रिक्त हैं, बावजूद इसके, इन्हें काउंसलिंग में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य विषयों के रिक्त पद जयपुर में दर्शाए गए हैं, तो उर्दू शिक्षकों के साथ भेदभाव क्यों? उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन 9 विद्यालयों को काउंसलिंग सूची में शामिल किया जाए, ताकि उर्दू शिक्षकों को भी समान अवसर मिल सके। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस पर क्या निर्णय लेता है।
पहले भी हो चुका है उर्दू विद्यालयों को मर्ज करने का विरोध
इससे पहले राजस्थान सरकार द्वारा उर्दू माध्यम के विद्यालयों को हिंदी या अंग्रेजी में मर्ज करने के फैसले के खिलाफ जोधपुर और अजमेर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। उर्दू शिक्षकों कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह रलावता और अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले का विरोध किया था। वहीं शिक्षकों और अभिभावकों का मानना है कि सरकार का यह कदम न केवल शिक्षा पर बल्कि सांस्कृतिक पहचान और भाषाई अधिकारों पर भी असर डालेगा। अगर सरकार ने जल्द इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला, तो यह मामला सामाजिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।
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