12 लाख की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं
- करीब 2 करोड़ टैक्सपेयर्स पर फोकस रहा बजट
- मंहगाई, बेरोजगारी, विकसित भारत, 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं
- कृषि, ग्रामीण विकास, अरबन डेवलपमेंट, शिक्षा एवं चिकित्सा क्षेत्र को कम बजट दिया गया है।
- देश में कमजोर, आर्थिक रूप से एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बजट में कुछ नहीं दिया गया है
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। केंद्रीय वित्त अत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को बजट 2025-26 का बजट संसद में पेश किया। बजट में 12 लाख तक की आमदनी वालों का टैक्स माफ कर दिया गया है। देश में करीब 2 करोड लोग हैं, जिनको 12 लाख की आमदनी की सीमा का फायदा मिल सकता है। भाजपा नेता, भाजपा सरकार और मीडिया केंद्रीय बजट को ऐसे पेश कर रहा है कि देश में सिर्फ दो करोड़ लोग ही जिनकी मोदी सरकार ने चिंता की। करीब दो से तीन करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी आमदनी 12 लाख वार्षिक से ज्यादा है। कुल मिलाकर पिछली बार 6 से 7 करोड लोगों ने सरकार को टैक्स दिया था। लेकिन मोदी सरकार ने बजट में देश में महंगाई, बेरोजगारी से निबटने का कोई उपाय नहीं बताया है। विकसित भारत का सपना और पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य कैसे पूरा किया जाएगा, केंद्रीय बजट में नहीं बताया गया है।
बजट में बहुत कुछ छिपाया जा रहा है:
वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक पुण्य प्रसून बाजपेयी ने कहा कि कारोपरेटर्स ज्यादा मुनाफा कमा रहा है और उनकी आमदनी बढ़ती जा रही है। लेकिन उन पर टैक्स नहीं बढ़ाया। देश के कॉर्पोरेटर के लाखों करोड़ों के कर्ज माफ कर दिए लेकिन देश के किसानों के कुछ हजार करोड़ माफ नहीं किए हैं। मोदी सरकार ने देश की करीब 135 करोड़ आबादी के लिए बजट में कैसे फायदा पहुंचेगा बजट में पता नहीं बताया। नया आयकर बिल संसद में कुछ दिन बाद पेश किया जाएगा। इस बिल के बाद ही बजट में सरकार की असलियत नजर आएगी। इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री ने कहा कि मोदी सरकार के बजट की वास्तविकता नए आयकर बिल संसद में पेश होने के बाद पता चलेगी। नया आयकर बिल सोची-समझी रणनीति के तहत दिल्ली विधानसभा चुनाव 5 फरवरी के बाद पेश किया जाएगा। यदि यह बिल एक फरवरी 2025 को ही पेश कर दिया जाता तो दिल्ली विधानसभा में भाजपा को फायदा नहीं पहुंचता। हेमंत अत्री का कहना है कि देश पर कर्ज का बड़ा बोझ है, जिसका 11 लाख करोड़ ब्याज के रूप में चुकाना पड़ता है। मोदी सरकार में जीएसटी टैक्स हर महीने बढ़ रहा है और सरकार इस टैक्स से आमदनी 20,000 करोड़ प्रति महीने तक बढ़ाना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार ने गाल को सहलाया है, थप्पड़ पड़ना अभी बाकी है। इससे साफ पता चलता है कि बजट में जो बताया जा रहा है उसकी वास्तविकता कुछ दिन बाद नये आयकर बिल पेश होने के बाद पता चलेगी।
देश के अल्पसंख्यकों को नजरअंदाज किया:
देश में आर्थिक रूप से कमजोर, शैक्षणिक रूप से पिछड़े एवं गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग विशेषकर मुस्लिम वर्ग के लिए बजट 2025-26 में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि किसी भी वर्ग, जाति एवं समुदाय के पिछड़ेपन को दूर करने की जिम्मेदारी देश की मोदी सरकार की है। जब तक देश में हर वर्ग का विकास नहीं किया जाएगा तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा ही माना जाएगा। मोदी का नारा सबका साथ और सबका विकास सिर्फ दिखावा प्रतीत होता है।
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