राजस्थान में सूर्य नमस्कार अनिवार्य, मुस्लिम संगठनों का विरोध
राजस्थान सरकार ने 3 फरवरी को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 20 मिनट तक सूर्य नमस्कार को अनिवार्य करने का आदेश दिया है। सरकार का दावा है कि इससे विद्यार्थियों की एकाग्रता और बौद्धिक विकास में सुधार होगा। लेकिन इस फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है।
मुस्लिम फोरम के प्रमुख मोहम्मद नाजीमुद्दीन ने इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है और संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ है।
“सरकारी स्कूलों
में किसी धर्म विशेष की परंपरा को थोपना गलत है। यह हमारे मौलिक अधिकारों का हनन है।” – मोहम्मद नाजीमुद्दीन, प्रमुख, मुस्लिम फोरम
संविधान और अदालतों के पुराने फैसले:
- सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट पहले ही ऐसे आदेशों को खारिज कर चुके हैं।
- केरल, मध्य प्रदेश और बिहार में भी सूर्य नमस्कार और सरस्वती वंदना को अनिवार्य करने की कोशिश हुई थी, लेकिन अदालतों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताकर रोक लगा दी थी।
मुस्लिम संगठनों की मांग:
मुस्लिम फोरम और अन्य संगठनों ने राजस्थान सरकार से इस आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सरकार इसे वापस नहीं लेती, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
क्या होगा सरकार के इस फैसले का भविष्य?
राज्य में इस फैसले को लेकर अब सियासी हलचल तेज हो गई है। क्या सरकार अपने फैसले पर कायम रहेगी, या विरोध के बाद इसे वापस लेगी? इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा सकती है।
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