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मोबाइल एप से करता था भ्रूण लिंग परीक्षण, गर्भवती महिला और पुलिस के डिकॉय ऑपरेशन से खुला राज

मोबाइल एप से करता था भ्रूण लिंग परीक्षण, गर्भवती महिला और पुलिस के डिकॉय ऑपरेशन से खुला राज

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Jodhpur Illegal Sex Determination Case : जोधपुर। राजस्थान में भ्रूण लिंग परीक्षण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जोधपुर में एक बड़ी कार्रवाई की गई है। राज्य की पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) टीम और पुलिस ने संयुक्त डिकॉय ऑपरेशन के दौरान एक नर्सिंग होम संचालक को कथित रूप से अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी अल्ट्रासाउंड की पोर्टेबल मशीन को मोबाइल से कनेक्ट करता था। फिर एप पर सोनोग्राफी की फोटोज देखकर गर्भस्थ शिशु का लिंग बताता था। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने डिकॉय ऑपरेशन किया। इस डिकॉय ऑपरेशन में एक गर्भवती महिला को भी शामिल किया। इस कार्रवाई में मौके से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, मोबाइल फोन और कथित तौर पर जांच के बदले ली गई नकद राशि भी बरामद की गई है।

लंबे समय से उनकी निगरानी में था आरोपी

यह कार्रवाई जोधपुर के बनाड़ थाना क्षेत्र स्थित श्री सागर नर्सिंग होम में की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी लंबे समय से उनकी निगरानी में था। उसके खिलाफ लगातार अवैध लिंग परीक्षण कराने की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों के सत्यापन के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने मिलकर डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई।

आरोपी को पकड़ने के लिए टीम बनाई

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के अनुसार, अभियान को पूरी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया। योजना के तहत एक गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में शामिल किया गया। महिला के साथ एक पुलिसकर्मी को उसके पति के रूप में भेजा गया ताकि आरोपी को किसी प्रकार का संदेह न हो। बताया गया कि आरोपी ने पहले महिला को पावटा क्षेत्र में बुलाया। आरोपी वहां से महिला को अपनी गाड़ी में बैठाकर नर्सिंग होम की ओर ले गया। रास्ते में कुछ दूरी पर महिला के साथ मौजूद पुलिसकर्मी, जो पति के रूप में गया था, उसे वाहन से उतार दिया गया। इसके बाद आरोपी महिला को अपने नर्सिंग होम ले गया, जहां कथित रूप से अवैध जांच की तैयारी की गई।

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महिला से 50 हजार लेने का आरोप

जैसे ही जांच की प्रक्रिया शुरू हुई, पहले से निगरानी कर रही टीम को संकेत मिला और पुलिस तथा पीसीपीएनडीटी टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। आरोपी को हिरासत में लिया गया और मौके से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, मोबाइल फोन तथा कथित रूप से जांच के बदले ली गई 50 हजार रुपये की नकद राशि बरामद की गई।

पोर्टेबल मशीन से बताता था गर्भस्थ शिशु का लिंग

जांच में सामने आया कि आरोपी एक हैंडहेल्ड पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस का उपयोग करता था। यह उपकरण तार के माध्यम से मोबाइल फोन से जुड़ जाता था। मोबाइल में इंस्टॉल विशेष एप के जरिए अल्ट्रासाउंड की तस्वीरें दिखाई देती थीं और उन्हीं के आधार पर कथित रूप से भ्रूण का लिंग बताया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग भारत में निर्धारित कानूनी नियमों के तहत ही किया जा सकता है और भ्रूण का लिंग बताना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

भ्रूण लिंग परीक्षण करना दंडनीय अपराध

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारत में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत भ्रूण का लिंग परीक्षण करना और करवाना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं। इस कानून का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और समाज में लिंगानुपात को संतुलित बनाए रखना है। इसी कारण देश में प्रत्येक सोनोग्राफी मशीन का पंजीकरण अनिवार्य है और उसकी निगरानी भी की जाती है।

आरोपी को जेल भेजा गया

आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपी कब से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था और उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे या नहीं। बरामद मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि संभावित ग्राहकों, संपर्कों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जानकारी मिल सके।

आरोपी के नेटवर्क की भी होगी जांच

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोपी के किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी इसी तरह के मामलों को अंजाम दिया था। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी भ्रूण लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। विभाग का कहना है कि ऐसी सूचनाओं पर गोपनीयता के साथ कार्रवाई की जाती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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