Loading...

राजस्थान कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी खींचतान! गहलोत और डोटासरा के रुख पर चर्चा तेज

राजस्थान कांग्रेस में फिर बढ़ी अंदरूनी खींचतान! गहलोत और डोटासरा के रुख पर चर्चा तेज

Follow us

Share

Rajasthan Congress Internal Rift : जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही अलग-अलग सोच और रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। चर्चा का केंद्र एक वरिष्ठ नेता की संभावित घर वापसी और उस पर पार्टी के बड़े नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बड़े विवाद की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

चर्चाएं उस समय तेज हुई जब एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ीं, जबकि दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बयान ने अलग संदेश दिया। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या पार्टी के भीतर किसी मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।

मालवीय की घर वापसी से शुरू हुई बहस

दरअसल, राजस्थान कांग्रेस की सियासत की इस नई कहानी की शुरुआत गुरुवार सुबह हुई। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने वाले आदिवासियों के दिग्गज नेता महेन्द्र सिंह मालवीय बीते दिनों अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए थे। उसके बाद मालवीय आदिवासी इलाके में तेजी से उभर रही भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के 309 स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को गुरुवार को कांग्रेस ज्वॉइन कराने जयपुर आए। वे अपनी इस पूरी टोली को कांग्रेस ज्वॉइन कराने के लिए प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) की बजाय पूर्व सीएम अशोक गहलोत के आवास जा पहुंचे।

Advertisement

पूर्व CM के आवास पर ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचे थे मालवीय

ढोल नगाड़ों के साथ वहां पहुंचे मालवीय ने अशोक गहलोत को पगड़ी पहनाई। इस पर बीएपी से कांग्रेस में शामिल होने आए कार्यकर्ताओं ने अशोक गहलोत को चौथी बार सीएम बनाने को लेकर जमकर नारेबाजी कर माहौल बना दिया। यही बात पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटसरा को अखर गई। उन्होंने गहलोत का नाम लिए बिना उन पर हमला बोलते इसे खुद की ब्रॉडिंग करना करार दिया। इसके साथ ही मालवीय के लिए भी कह डाला कि उनको सोचना चाहिए था कि पहले कहां जाना चाहिए। डोटासरा ने व्यक्तिगत ब्रॉडिंग को पार्टी के लिए घातक करार दिया।

गहलोत के लिए क्या बोले डोटासरा

उसके बाद मालवीय जब इन कार्यकर्ताओं को लेकर बाद में कांग्रेस दफ्तर पहुंचे। बताया जा रहा है कि काफी समय तक तो डोटासरा उनसे मिले ही नहीं। बाद में जब मिले तो गोविंद सिंह डोटासरा ने मंच पर मालवीय से माइक लेकर उनको फटकारते हुए कहा कि ‘यहां मुख्यमंत्री वाले नारे मत लगाना, ये पार्टी का मंच है। यहां व्यक्ति विशेष की बात मत करना, नहीं तो पहले जैसी स्थिति हो जाएगी।’ इसके बाद डोटासरा ने मीडिया से बातचीत में बिना नाम लिए कहा कि ‘कोई व्यक्ति अपनी ब्रांडिंग के लिए काम करे तो वह उनको मुबारक हो, मैं कांग्रेस के लिए काम करता हूं।’ डोटासरा-गहलोत को फिर सीएम बनाने को लेकर की गई नारेबाजी से इतने नाराज हुए कि उन्होंने मालवीय और गहलोत पर तंज कसने के साथ ही बड़ा आरोप भी लगा डाला। डोटासरा ने कहा कि अगर 2024 में मालवीय के बीजेपी से बांसवाड़ा से चुनाव लड़ते वक्त मैंने भी उनकी मदद की होती तो आज मेरे समर्थन में भी नारे लगते।

डोटासरा ने तंज के साथ ही दे डाली नसीहत

वहीं डोटासरा ने लगे हाथ मालवीय को नसीहत भी दे डाली। वे बोले कि मालवीय जी BJP में गए थे, इनकी दाल नहीं गली। ना तो ये विधायक बन सके और न ही सांसद बन पाए। कोई गलतफहमी हो तो एक बार फिर मालवीय पार्टी बदले लें। अगर ये जीतकर आ जाए तो मेरा नाम बदला देना। मैंने इनको हराने का चैलेंज दिया था और हराया। मेरी अभिशंसा के बिना ये अब भी कांग्रेस में नहीं आ सकते थे। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में बांसवाड़ा-डूंगरपुर सीट से बीएपी के राजकुमार रौत ने चुनाव लड़ा था। बीजेपी ने मालवीय का चुनाव मैदान में उतारा था। लेकिन कांग्रेस और बीएपी की एकजुटता से राजकुमार रौत चुनाव जीत गए और मालवीय हार गए थे।

इस मामले को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी बड़े दल में अलग-अलग राय होना सामान्य बात है, लेकिन जब वरिष्ठ नेताओं के बयान अलग-अलग संकेत देने लगते हैं तो संगठन के भीतर मतभेद की अटकलें भी तेज हो जाती हैं। राजस्थान कांग्रेस में फिलहाल कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।