Loading...

’20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूं…’ सोनम वांगचुक बोले-इसी दिन CJP का संसद मार्च, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा

’20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूं…’ सोनम वांगचुक बोले-इसी दिन CJP का संसद मार्च, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा

Follow us

Share

Sonam Wangchuk Hunger Strike : नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (Cockroach Janata Party) का प्रदर्शन पिछले 27 दिनों से चल रहा है। शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) इस प्रदर्शन में 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। सोनम वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम कम हो गया है। अनशन शुरू होने पर वजन 67 किग्रा था। इस बीच सोनम वांगचुक ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर 20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहते हैं। उन्होंने 20 जुलाई को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च में समर्थकों से बड़ी संख्या में जुटने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे लोकतंत्र के मंदिर में अपनी बात रखेंगे। वांगचुक ने कहा कि वह बाहर से कमजोर हैं, लेकिन अंदर से मजबूत हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ, तो वह भूत बनकर वापस आएंगे। डॉक्टरों ने कहा कि वांगचुक के ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार को उनकी रोजाना मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए थे।

CJP का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वांगचुक भी उनके आंदोलन में शामिल हैं। केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर बहुत हरकत में नहीं दिख रही है, लेकिन वांगचुक के अनशन की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी अच्छी खासी है। अमेरिका के प्रमुख अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने 16 जुलाई की एक रिपोर्ट में लिखा है कि लाखों भारतीय छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे युवाओं के आंदोलन को वांगचुक की भूख हड़ताल से नई गति मिली है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘भारत सरकार ने अब तक सीजेपी और सोनम वांगचुक की उस मांग पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई है। पिछले महीने धर्मेंद्र प्रधान ने एक टीवी इंटरव्यू में इन प्रदर्शनों को खारिज करते हुए सीजेपी को “अराजक तत्वों की बी-टीम” बताया था।

वहीं ब्रिटेन की न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि दिल्ली की एक अदालत ने सरकार को सोनम वांगचुक की सेहत पर नजर रखने के लिए निर्देश दिया है। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘यह पहली बार है, जब किसी अदालत ने इस प्रदर्शन में दखल दिया है। वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर उनके समर्थकों में चिंता बढ़ती जा रही है। अदालत के निर्देश का मतलब है कि अगर उनकी हालत खराब होती है तो उन्हें अस्पताल ले जाया जा सकता है।

वॉशिंगटन पोस्ट ने क्या लिखा है?

अमेरिका के प्रमुख अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने 16 जुलाई की अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि सोनम वांगचुक सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी ऐसा होता दिख नहीं रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘प्रदर्शन स्थल पर सुबह होते ही छात्र प्रदर्शनकारी खुले आसमान के नीचे बिताई एक और रात के बाद अपना बिस्तर समेटने लगे। शिविर के बीचोंबीच एक तंबू में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लेटे हुए थे। कई हफ़्तों की भूख हड़ताल का असर उनके कमजोर पड़ चुके शरीर पर साफ दिखाई दे रहा था।’

Advertisement

अमेरिका स्थित भारतीय प्रवासी संगठन की ये मांग

अमेरिका की न्यूज एजेंसी एपी ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि भारत सरकार ने न तो आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू की है और न ही सार्वजनिक रूप से उनकी मांगों को स्वीकार किया है। शिक्षा मंत्रालय ने भी एपी के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। एपी ने लिखा है, ‘मोदी सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने बड़े पैमाने पर इस आंदोलन को खारिज किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने आंदोलन के सदस्यों पर देश के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार के अन्य नेताओं का कहना है कि छात्रों की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन सरकार के लिए उनसे बातचीत करना जरूरी नहीं है। प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि सरकार की चुप्पी ने उनके संकल्प को और मजबूत कर दिया है, जबकि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल लगातार जारी है।’

सीजेपी पार्टी की ऐसे हुई शुरूआत

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का यह आंदोलन एक कटाक्ष के रूप में शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत उस समय हुई, जब भारत के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी और तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। हालांकि बाद में उन्होंने सफ़ाई दी थी और कहा था कि उनकी टिप्पणी की व्याख्या गलत तरीके से की गई।

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।