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भारत के कई इलाकों से गायब हुए बादल! कई राज्यों में मानसून पर ब्रेक…राजस्थान में पहली बार हुआ ऐसा

भारत के कई इलाकों से गायब हुए बादल! कई राज्यों में मानसून पर ब्रेक…राजस्थान में पहली बार हुआ ऐसा

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नई दिल्ली/जयपुर। देशभर में मानसून अलग-अलग रंग दिखा रहा है। एक तरफ भारत के कई राज्यों में मानसून की भारी बारिश से आम लोगों की जिंदगी बेहाल है। वहीं दूसरी ओर मानसून पर हल्की ब्रेक लग गई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम-उत्तर और मध्य भारत में ‘मानसून ब्रेक’ की वजह से कई दिनों तक बारिश की संभावना नहीं है। मौसम में आए इस अचानक बदलाव पर विशेषज्ञ चिंता जाहिर कर रहे हैं। खास कर ऐसे वक्त पर जब देश में मानसून की बारिश पहले से ही औसत से काफी कम हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 6-7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश के आसार कम हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिहार, असम, मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल में लैंडस्लाइड और बाढ़ की खबरें सामने आ रही हैं।

इधर, मध्य प्रदेश में पहली बार जुलाई में मानसूनी सीजन में कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश 250.1 मिमी से 3 फीसदी कम है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 1 जून से 13 जुलाई के बीच 161.6 मिमी बारिश हुई, जो कि औसतन 199.7 मिमी से 19 फीसदी कम है। राजस्थान में पहली बार ऐसा हुआ है जब जुलाई के तीसरे सप्ताह में कहीं भी बारिश नहीं हुई है। यहां पिछले 24 घंटे में कहीं भी बारिश नहीं हुई। जुलाई में पहली बार श्रीगंगानगर में अधिकतम पारा 41.5 डिग्री सेल्सियस रहा।

इस बीच मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान ने साफ कर दिया है कि अगले 24 घंटे देश के बड़े हिस्से के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। एक साथ सक्रिय हुए पांच वेदर सिस्टम ने उत्तर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड तक तेज बारिश और आंधी की संभावना जताई गई है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जबकि समुद्री इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

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21 राज्यों में तूफान, तेज बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार 14 जुलाई को देश के 21 राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाएं और कई जगहों पर वज्रपात की आशंका है। 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। बंगाल की खाड़ी, पूर्वी बांग्लादेश और मध्य पाकिस्तान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ मिलकर पूरे मौसम सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं। उत्तर-पश्चिम बिहार से मणिपुर तक फैली टर्फ लाइन और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने सिस्टम का असर पूर्वी भारत में सबसे अधिक दिखाई देगा। मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।

आंधी और बिजली बढ़ाएगी लोगों की मुश्किलें

देशभर में सक्रिय वेदर सिस्टम का असर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रूप में दिखाई देगा। कहीं भारी बारिश होगी तो कहीं तेज आंधी और बिजली लोगों की मुश्किलें बढ़ाएगी। पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। कई नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है, जिससे निचले इलाकों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों और पश्चिमी घाट में भी बारिश का नया दौर शुरू होने की संभावना है।

पूर्वी भारत में जारी रहेगी बारिश

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल मानसून की धुरी सामान्य स्थिति के आसपास बनी हुई है, लेकिन उसके साथ सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन बारिश की तीव्रता बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि उत्तर भारत के साथ-साथ पूर्वी भारत में भी बारिश का दायरा तेजी से फैल रहा है। किसानों के लिए यह बारिश जहां फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं अधिक बारिश फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है। इसलिए अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।

दिल्ली-NCR में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर में 14 जुलाई को मौसम तेजी से बदल सकता है। IMD ने भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को खुले स्थानों, कमजोर पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

एमपी में जुलाई में पहली बार 3 फीसदी से कम बारिश

मानसूनी सीजन में जुलाई में पहली बार मध्य प्रदेश में बारिश का आंकड़ा माइनस में आया है। प्रदेश में पिछले 5 दिन से भारी या अति भारी बारिश नहीं हुई है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्से में बादल तो छा रहे, लेकिन बरस नहीं रहे। इस वजह से प्रदेश के आधे से ज्यादा जिले में सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक- प्रदेश में सामान्य से 3 प्रतिशत पानी कम गिरा है। पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग में एवरेज से 17 फीसदी और पश्चिमी हिस्से यानी- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम ग्वालियर-चंबल में 10 फीसदी कम बारिश हुई है।

यूपी में कमजोर पड़ा मानसून

यूपी में मानसून कमजोर पड़ गया है। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ों पर हो रही जोरदार बारिश से नदियां उफान पर हैं। प्रयागराज में गंगा और यमुना का पानी घाटों पर बनी दुकानों तक पहुंच गया है। बिजनौर में मालन नदी उफान पर है। पानी छोटे पुलों के ऊपर से बह रहा है। बलिया में सरयू और घाघरा नदी के किनारों पर कटान शुरू हो गया है। इसके चलते बांसडीह में 150 परिवार घर छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं। बागपत में यमुना उफान पर है। मौसम विभाग का कहना है कि पाकिस्तान से आ रही सूखी हवाओं के चलते पश्चिमी यूपी से मानसूनी बादल गायब हो गए हैं। इससे 3-4 दिनों तक बारिश पर ब्रेक लगा रहेगा। पूर्वी यूपी में हल्की बारिश होगी। मौसम विभाग ने आज 25 शहरों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।

राजस्थान में मानसून पर लगा ब्रेक

राजस्थान में मानसून पूरी तरह थम गया है। पिछले 24 घंटे में राजस्थान में कहीं भी बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई। राजस्थान में सोमवार को बादलों की आवाजाही रही, लेकिन कहीं भी बारिश नहीं हुई। बारिश का दौर थमते ही राजस्थान में एक बार फिर सूरज के तेवर तीखे हो गए हैं और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। श्रीगंगानगर में अधिकतम 41.5 डिग्री सेल्सियस रहा। फलोदी में 39.4, बीकानेर में 39.2, अलवर में 38.1, पिलानी (झुंझुनूं) में 38.2, जैसलमेर में 38.4, चूरू में 38.6 और हनुमानगढ़ के संगरिया में 37.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम पारा रहा। मौसम विभाग ने 16 जुलाई को एक बार फिर से बारिश की एंट्री होने की उम्मीद जताई है।

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