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किसान के चार बेटे-बेट‍ियां, एक सपना… खाकी, सबको एक साथ वर्दी में देख चौंक गया पूरा गांव

किसान के चार बेटे-बेट‍ियां, एक सपना… खाकी, सबको एक साथ वर्दी में देख चौंक गया पूरा गांव

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Success Story Four Siblings From Haryana : भिवानी। देश में लाखों युवा सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं। कई लोग वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता हर किसी को नहीं मिलती। ऐसे समय में हरियाणा के एक किसान परिवार की कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। भिवानी जिले के तौशाम तहसील के सण्डवा गांव के एक ही परिवार के चार सगे भाई-बहनों ने खाकी वर्दी पहनकर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे गांव ही नहीं बल्कि प्रदेश का भी नाम रोशन कर दिया है। इन चारों भाई-बहनों ने यह साबित कर दिया कि अगर मेहनत, लगन और सही दिशा में तैयारी की जाए तो गांव में रहकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। आज परिवार के तीन सदस्य हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ पुलिस में सेवा दे रहे हैं, जबकि चौथा रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में तैनात है।

हरियाणा के किसान अत्‍तर सिंह के बेटे-बेटियां

यह प्रेरणादायक परिवार हरियाणा के भिवानी जिले के सण्डवा गांव का रहने वाला है। परिवार के मुखिया अत्तर सिंह किसान हैं। खेती करके उन्होंने अपने परिवार का पालन-पोषण किया और सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। आर्थिक चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन माता-पिता ने हमेशा बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। इसी का परिणाम है कि आज उनके चार बेटे-बेटियां सरकारी सेवा में खाकी वर्दी पहनकर देश की सेवा कर रहे हैं।

गांव के स्कूल से शुरू हुई सफलता की कहानी

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, श्याम सुंदर ने बताया कि चारों भाई-बहनों की शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया और पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कर दी। उन्होंने किसी महंगे कोचिंग संस्थान या बड़े शहर पर निर्भर रहने के बजाय नियमित पढ़ाई, आत्मविश्वास और अनुशासन को अपनी ताकत बनाया। लगातार अभ्यास और सही रणनीति की वजह से उन्हें शुरुआती प्रयासों में ही सफलता मिलने लगी। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो यह सोचते हैं कि केवल बड़े शहरों में पढ़कर ही सरकारी नौकरी हासिल की जा सकती है।

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पहली बार चारों एक साथ खाकी वर्दी में आए नजर

परिवार के पांचवें भाई श्याम सुंदर राजस्थान के सीकर स्थित प्रिंस एकेडमी में गणित के शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि 30-31 मार्च 2026 को उनके घर पर बालाजी और श्याम बाबा की सवामणी (प्रसाद) का आयोजन रखा गया था। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि चारों भाई-बहन पहली बार एक साथ खाकी वर्दी में शामिल हुए। इससे पहले वे कई कार्यक्रमों में साथ आए थे, लेकिन इस बार उन्होंने तय किया कि वे वर्दी में ही शामिल होंगे. यही पल परिवार और गांव के लिए सबसे खास बन गया।

चारों भाई-बहन कहां तैनात?

सुदेश: परिवार की सबसे बड़ी बेटी सुदेश ने साल 2010 में चंडीगढ़ पुलिस में कांस्‍टेबल के रूप में भर्ती होकर परिवार में पहली सरकारी नौकरी हासिल की थी। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी होने से पहले ही यह सफलता पाई थी. उनके पति घनश्याम पूनिया सेना में कार्यरत हैं।

उर्मिला: सुदेश के बाद उनकी बहन उर्मिला ने भी प्रेरणा लेकर कोविड के दौरान रेलवे सुरक्षा बल में कांस्‍टेबल पद के लिए आवेदन किया और चयन हासिल किया। वर्तमान में वह अंबाला में तैनात हैं। उनके पति रवि चंडीगढ़ पुलिस में हैं।

मोनिका: परिवार की तीसरी बेटी मोनिका ने भी अपने बहनों के रास्ते पर चलते हुए दिल्ली पुलिस कांस्‍टेबल भर्ती परीक्षा 2024 पास की और खाकी वर्दी हासिल की।

अंकित: सबसे छोटे भाई अंकित ने अपनी तीनों बहनों से प्रेरणा लेकर द‍िल्‍ली पुलिस कांस्‍टेबल भर्ती में हिस्सा लिया। पहली बार सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में हरियाणा पुलिस में कांस्‍टेबल के रूप में चयन पा लिया। वर्तमान में अंक‍ित रोहतक जिले में तैनात हैं।

मां पढ़ी-लिखी नहीं, लेकिन शिक्षा का महत्व समझा

पूरे परिवार की सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान माता-पिता का माना जा रहा है। पिता अत्तर सिंह 12वीं तक पढ़े हैं, जबकि मां राजवंती देवी पढ़ी-लिखी नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया। मां अक्सर बच्चों से पढ़ाई के बारे में पूछती थीं और यह जानने की कोशिश करती थीं कि उनकी तैयारी कैसी चल रही है। वहीं पिता हमेशा बच्चों को मेहनत करने और हार न मानने की सीख देते रहे। बच्चों ने भी इस बात को अपना मंत्र बना लिया और लगातार मेहनत करते रहे।

सफलता का मूलमंत्र क्या रहा?

श्याम सुंदर के अनुसार चार सगे भाई-बहनों का पुल‍िस कांस्‍टेबल बनने का उनके गांव में पहली बार हुआ है। चारों ने एक जैसी रणनीति अपनाई। कॉलेज के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नियमित पढ़ाई। इसी अनुशासन और निरंतर प्रयास ने उन्हें सफलता तक पहुंचाया।

युवाओं के लिए बड़ी सीख

आज हरियाणा के इस किसान परिवार ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा ही जीवन बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। माता-पिता का विश्वास, बच्चों की लगन और लगातार की गई मेहनत किसी भी सपने को सच कर सकती है। आज चारों भाई-बहनों की सफलता पूरे गांव के लिए गर्व का विषय है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी।

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