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होर्मुज में फिर भड़की जंग की चिंगारी, अमेरिका ने ईरान पर किया हमला, लेबनान में फिर बढ़ा तनाव

होर्मुज में फिर भड़की जंग की चिंगारी, अमेरिका ने ईरान पर किया हमला, लेबनान में फिर बढ़ा तनाव

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तेल अवीव/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों की सेनाओं ने एक दूसरे देशों के ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका ने ईरान पर यह कहकर हमला किया कि ईरान ने हार्मुज में एक व्यापारिक कार्गो जहाज पर हमला किया था। हमले के तुरंत बाद ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अमेरिका के हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा। यह दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में हुए समझौते के बाद पहला सीधा सैन्य टकराव है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर करीब एक घंटे तक हमले किए। अमेरिकी सेना ने मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने सीजफायर तोड़ा, इसलिए जवाबी कार्रवाई की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के कार्गो शिप ‘एमवी एवर लवली’ पर ड्रोन हमला किया था। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया है कि उसने जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है

अमेरिका ने ईरान पर हमले का वीडियो जारी किया

अमेरिकी की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है, जिसे ईरान पर किए गए हमले से जुड़ा बताया जा रहा है। ब्लैक एंड व्हाइट इस वीडियो में धमाके होते और धुआं उठता दिखाई दे रहा है, लेकिन किसी खास ठिकाने या लक्ष्य की स्पष्ट पहचान नहीं हो पा रही है।

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- हिंसा से दिया जाएगा

वहीं इस पूरे मामले को लेकर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि विवादों को बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन अगर हिंसा जारी रहती है तो जवाब भी उसी तरह दिया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर समझौते (MOU) के लागू होने को लेकर कोई मतभेद है, तो ईरान को फोन पर बातचीत करनी चाहिए।

ईरान का आरोप- NATO देशों पर ईरान का निशाना

वहीं ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है। युद्धविराम का यह उल्लंघन अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछतावे की वजह बनेगा। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के हमले में साथ देने वाले NATO सदस्य देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन देशों को बताना चाहिए कि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन क्यों किया।

होर्मुज में जहाज पर हमला

वहीं ओमान के तट के पास होर्मुज स्ट्रैट में एक मालवाहक जहाज पर अज्ञात हथियार से हमला हुआ। जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, हालांकि, कोई हताहत नहीं हुआ। घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने 11 हजार नाविकों को निकालने का अभियान फिलहाल रोक दिया।

लेबनान में फिर बढ़ा तनाव

इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-मंसूरी इलाके में लोगों को घर खाली करने की चेतावनी दी। वहीं, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने कहा कि इजराइल को लेबनान की पूरी जमीन से बिना शर्त हटना होगा और संगठन किसी भी हाल में इजराइल से रिश्ते सामान्य नहीं करेगा।

ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा में बढ़ी बातचीत

अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता पूरी हुई। दोनों देशों ने चार संयुक्त कमेटियां बनाने और 60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। रूस ने भी कहा कि अंतिम समझौता होने पर वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका समर्थन करेगा।

परमाणु कार्यक्रम और तेल बाजार दोनों पर नजर

IAEA ने कहा कि उसकी टीम जल्द ही ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करेगी। दूसरी ओर, होर्मुज में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जबकि भारत ने कमर्शियल LPG की सप्लाई पर लगी पाबंदियां हटाकर आपूर्ति सामान्य करने का फैसला लिया।

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की कार्रवाई

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने दावा किया है कि उसने ईरान के तटीय इलाकों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने कहा कि अमेरिका युद्धविराम का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है और अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर नहीं चलेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिखा दिया है कि वे न तो बातचीत के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं और न ही युद्धविराम के प्रति। युद्धविराम का यह उल्लंघन अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछतावे की वजह बनेगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका उसका पालन कर रहा है। अगर समझौते को लागू करने को लेकर ईरान को कोई आपत्ति है तो वह बातचीत कर सकता है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।

हिजबुल्लाह बोला- इजराइल बिना शर्त लेबनान छोड़े

हिजबुल्लाह ने इजराइल से लेबनान से पूरी सेना वापस बुलाने की मांग की है। हिजबुल्लाह चीफ कासिम नईम ने कहा कि इजराइली सैनिकों को लेबनान की जमीन का एक-एक इंच खाली करना होगा। युद्धविराम लागू होने के बाद लेबनान पर इजराइल के हमले पहले के मुकाबले कम हुए हैं, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। इजराइल ने नबतियेह अल-फौका कस्बे पर हवाई हमला किया। इससे पहले मायफदून कस्बे पर हुए हमले में दो लोगों की मौत की खबर सामने आई। इसके अलावा लेबनान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, इजराइली सेना ने दक्षिणी शहर मंसूरी में पर्चे गिराकर लोगों से इलाका खाली करने को कहा।

इजराइल-लेबनान के बीच 14 पॉइंट समझौते हुआ

अमेरिका में शुक्रवार को बातचीत के बाद इजराइल और लेबनान के बीच 14 पॉइंट का समझौता हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस समझौते का मसौदा भी जारी किया है। इसके मुताबिक, लेबनानी सेना पूरे देश में दोबारा अपना नियंत्रण संभालेगी। इसके बदले हिजबुल्लाह जैसे हथियारबंद समूहों को हथियार छोड़ने होंगे और उनके ठिकाने हटाने होंगे। ऐसा होने के बाद इजराइली सेना धीरे-धीरे लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटेगी।

होर्मुज के पास कतर के LNG टैंकर ने रास्ता बदला

जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनी केप्लर के मुताबिक, करत की कंपनी करतएनर्जी के LNG टैंकर ‘उम्म सलाल’ ने होर्मुज सट्रेट के पास रास्ता बदल दिया। कंपनी ने बताया कि ‘गैसलॉग शंघाई’ नाम के एक अन्य LNG टैंकर ने भी गुरुवार को इसी इलाके में अपना रास्ता बदल लिया था। ईरान के दक्षिणी शहर सिरिक में विस्फोटों की खबर आने से पहले यह रिपोर्ट जारी की गई थी। कंपनी ने कहा कि इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र से LNG शिपिंग को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

यह संघर्ष तब शुरू हुआ, जब 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके कुछ दिनों बाद हिजबुल्ला ने इस्राइल पर रॉकेट दागे थे। इसके बाद इस्राइल ने लेबनान में घुसकर अपना नियंत्रण बढ़ा दिया। मार्च से अब तक लेबनान में इस्राइली हमलों में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, लड़ाई के दौरान इस्राइल के 37 सैनिक लेबनान या उत्तरी इस्राइल में मारे गए हैं। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष में थोड़ी कमी आई थी। लेकिन इस्राइल की ओर से दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमलों के बाद तनाव फिर बढ़ गया।

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