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राजस्थान में गरमाई सियासत: मदन राठौड़ ने विपक्ष पर साधा निशाना, हनुमान बेनीवाल पर लगाए गंभीर आरोप

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जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्षी राजनेताओं द्वारा लगातार अपनाई जा रही असंसदीय भाषा, अराजक राजनीति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध किए जा रहे आचरण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, विरोध भी होना चाहिए, लेकिन विरोध और दुश्मनी के बीच की रेखा को लांघना लोकतंत्र के लिए घातक है। राठौड़ ने कहा कि भाजपा विचारों का विरोध करती है, लेकिन हमारी राजनीतिक संस्कृति में शब्दों की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। विपक्ष का धर्म सरकार की कमियों को उजागर करना है, जनता के मुद्दों को उठाना है और वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है, लेकिन व्यक्तिगत कटुता, अपमानजनक शब्दों और सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल या नेता को शोभा नहीं देता।

राजनीति में संवाद, शालीनता और वैचारिक संघर्ष की बड़ी आवश्यकता

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आज राजनीति में सबसे बड़ी आवश्यकता संवाद, शालीनता और वैचारिक संघर्ष की है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए समाज में टकराव और आवेश का वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। हनुमान बेनीवाल की भाषा और उनके सार्वजनिक वक्तव्यों में बार-बार इसी प्रवृत्ति की झलक दिखाई देती है। राठौड़ ने कुचामन प्रवास के दौरान हनुमान बेनीवाल के समर्थकों द्वारा किए गए हमले पर कहा कि अचानक कुछ लोग हाथों में तख्तियां लेकर उनकी गाड़ी के समीप पहुंचे और आक्रामक व्यवहार करने लगे। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें वाहन से नीचे उतरने से रोक दिया। राठौड़ ने कहा कि यदि कोई अपनी बात रखना चाहता है तो उसका स्वागत है, लेकिन यदि किसी की मंशा संवाद के बजाय भय का वातावरण बनाना या हमला करने जैसी प्रतीत हो, तो यह लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि अराजकता का संकेत है। इस प्रकार की घटनाएं यह अवश्य दर्शाती हैं कि कुछ लोग लोकतांत्रिक विरोध के बजाय टकराव की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं।

युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हनुमान बेनीवाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि एक जन प्रतिनिधि की जिम्मेदारी युवाओं को सकारात्मक दिशा देना, कानून का सम्मान करना और समाज में अनुशासन एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना होती है, लेकिन जब कोई नेता सार्वजनिक मंचों से लोगों को बिजली बिल नहीं भरने, मीटर रीडर का विरोध करने, सरकारी व्यवस्थाओं को चुनौती देने या कानून व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने वाले संदेश देता है, तो वह युवाओं को गलत दिशा में ले जाने का कार्य करता है। राठौड़ ने कहा कि वे कानून के शासन को कमजोर करते हैं। स्पष्ट है कि बेनीवाल युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के साथ ही पथभ्रष्ट कर रहे है। वे स्वयंभू सुप्रीमो बन रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने और लोगों को उकसाने का अधिकार किसी को नहीं है।

राजनीतिक जीवन में शब्दों का विशेष महत्व

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि संविधान की शपथ लेकर संसद और विधान मंडलों में पहुंचने वाले जन प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव रखें। जो लोग स्वयं संविधान की शपथ लेते हैं और फिर जनता को व्यवस्था के खिलाफ भड़काने का कार्य करते हैं, उन्हें आत्म मंथन करने की आवश्यकता है। राजनीतिक जीवन में शब्दों का विशेष महत्व होता है। एक नेता के शब्द लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इसलिए सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज कुछ नेता ऐसी शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं जो न केवल राजनीतिक संवाद को दूषित कर रही है बल्कि लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रही है। भाजपा का स्पष्ट मानना है कि विपक्ष मजबूत होना चाहिए, सरकार की आलोचना भी होनी चाहिए और जन हित के मुद्दों पर संघर्ष भी होना चाहिए, लेकिन विरोध का अर्थ दुश्मनी नहीं होता। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शत्रु नहीं होते। लोकतंत्र में ऐसा वातावरण होना चाहिए कि विचारों में मतभेद होने के बावजूद व्यक्ति एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखें।

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वैचारिक संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटेगी बीजेपी

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि राजनीति को व्यक्तिगत आरोपों, अभद्र भाषा और उकसावे की संस्कृति से मुक्त करने की आवश्यकता है। समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करना राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है। यदि राजनीतिक दल और नेता स्वयं मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी और जनता का विश्वास भी प्रभावित होगा। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि लोकतांत्रिक मूल्यों, शालीन राजनीतिक संवाद और सकारात्मक राजनीति को बढ़ावा देने में अपनी रचनात्मक भूमिका निभाएं। समाज और लोकतंत्र के हित में ऐसी राजनीति को प्रोत्साहन मिलना चाहिए जो संवाद, विकास, संवैधानिक मूल्यों और जनसेवा पर आधारित हो। भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं, राजनीतिक शुचिता और स्वस्थ संवाद की पक्षधर रही है और आगे भी रहेगी। भाजपा वैचारिक संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटेगी, लेकिन राजनीति को व्यक्तिगत दुश्मनी, असंसदीय भाषा और अराजकता का माध्यम बनाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देती रहेगी।

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