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डंके की चोट पर मध्यप्रदेश में लागू होगा ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण- मोहन यादव

जयपुर

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ओबीसी आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश में घमासान

-मुख्यमंत्री मोहन यादव को बताया जा रहा है रामद्रोही और सवर्ण द्रोही

एम खान

(रॉयल पत्रिका)। मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर सवर्ण वर्ग एवं ओबीसी वर्ग में घमासान छिड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर आ रही खबरों की माने तो सवर्ण और ओबीसी वर्ग का यह का घमासान भाजपा को भारी पड़ सकता है। एक तरफ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में डंके की चोट पर ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा। मुख्यमंत्री के प्रतिक्रिया के बाद सवर्ण वर्ग की ओर से उनके विरोध में सोशल मीडिया पर तीव्र क्रोध और टिप्पणी दिखाई दी। स्वामी आनंद स्वरूप ने तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देशद्रोही, धर्मेंद्रोही, रामद्रोही एवं सवर्ण द्रोही तक बता दिया। स्वामी आनंद स्वरूप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया गया तो मध्यप्रदेश से भाजपा समाप्त हो जाएगी। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं। मध्यप्रदेश में पहले से 14 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी, 16 प्रतिशत एससी, 20 प्रतिशत आरक्षण एसटी और 10 प्रतिशत आरक्षण ईडब्ल्यूएस (सवर्ण) को मिल रहा है। सवर्ण वर्ग ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने के प्रयास का विरोध कर रहा है। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य हैं।

27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का क्या प्रभाव पड़ेगा-

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू होने से कुल आरक्षण की सीमा 74 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। पहला सवर्ण वर्ग को पूरे 50 प्रतिशत नॉन आरक्षण का फायदा मिल रहा था। लेकिन 27 प्रतिशत आरक्षण मध्यप्रदेश में लागू होने के बाद 26 + 10 (ईडब्ल्यूएस) 36 प्रतिशत का ही फायदा मिल पाएगा। भाजपा शासित राज्यों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू होने का यह पहला मामला सामने आया है। सवर्ण वर्ग के लोग मोहन यादव को सवर्ण एवं भाजपा विरोधी बताने लगे हैं।

जातियों का ध्रुवीकरण बढ़ेगा-

मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू होने के बाद राजनीतिक परिदृश्य बदलने की पूरी संभावना है। मध्यप्रदेश में ज्यादातर सवर्ण वर्ग के मुख्यमंत्री बनते आए हैं और सरकारों में भी सवर्ण वर्ग का दबदबा रहा है। जबकि जनसंख्या 10 से 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। आरक्षण लागू होने से सत्ता और शासन में ओबीसी, एससी, एवं एसटी के लोगों का दबदबा बढ़ेगा। अगर ऐसा होता है तो भाजपा के शासन में सवर्ण वर्ग का बड़ा नुकसान होगा। जबकि सवर्ण वर्ग के कारण ही भाजपा सत्ता में है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बीजेपी मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बदलेगी या फिर सवर्ण वर्ग से किनारा करेगी? भविष्य में ही पता चल पाएगा।

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