जिले की लालासर गांव में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा का हुआ अनावरण
भगत सिंह के पौत्र यादवेन्द्र सिंह, जिला उप प्रमुख महेन्द्र न्यौल, डीडीपीआर कुमार अजय, रोनी रमन सहित अतिथि रहे मौजूद
मोहम्मद अली पठान
चूरू (रॉयल पत्रिका)। जिले के लालासर गांव में रविवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में शहीद भगतसिंह ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा भगत सिंह के पौत्र यादवेन्द्र सिंह, जिला उप प्रमुख महेन्द्र न्यौल, डीडीपीआर कुमार अजय, रोनी रमन, जेकेटी फौजी, धर्मवीर जाखड़, विक्की दूधवा सहित अतिथि मौजूद रहे। इस अवसर पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह के पौत्र यादवेन्द्र सिंह संधू ने कहा कि शहीद भगत सिंह हर विचार— हर संघर्ष में जिंदा हैं। भगत सिंह केवल मेरे परिवार का गौरव नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष की आत्मा हैं। भगत सिंह के आदर्शों से आज की युवा पीढ़ी में जूनून, जज्बा और जोश भारत की आत्मा व गौरव को जिंदा रखता है। उन्होंने कहा कि गांव के युवाओं द्वारा उनके आदर्शों पर चलकर प्रतिमा स्थापना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा देगी। हम सभी भारत को सच्चे आदर्शों पर आगे बढ़ाएं और आजादी के लिए उनके बलिदान को साकार करें। हम उनके विचारों, साहस और बलिदान को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा के साथ सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संकल्प लें। संधू ने चूरू की धरा को आजादी के आंदोलन की प्रेरक भूमि बताते हुए कहा कि चूरू में तो आजादी से 17 वर्ष पहले ही स्वामी गोपालदास के साथियों ने तिरंगा फहरा दिया दिया। राजस्थान त्याग और बलिदान की भूमि है वीर तेजाजी के त्याग और महाराणा प्रताप के स्वतंत्रता संघर्ष से भारत प्रेरित होता है। जिला उप प्रमुख महेन्द्र न्यौल ने कहा कि हमें शहीद भगत सिंह के आदर्शों पर चलकर भगत सिंह के सपनों का भारत बनाना है। भगत सिंह के विचार नई पीढ़ी को देशभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि भगत सिंह के विचारों व आदर्शों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका है। देशभक्ति गायक रोनी रमन ने संस्कारवान शिक्षा की बात कही और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। युवा लेखक व डीडीपीआर कुमार अजय ने कहा कि “शहीद भगत सिंह ने जिस उम्र में अपने प्राण राष्ट्र के लिए न्योछावर कर दिए, उस उम्र में आज के युवा अपने जीवन की दिशा खोज रहे होते हैं। आज आवश्यकता है कि हम उनके विचारों को आत्मसात करें — क्रांति केवल हथियारों से नहीं, विचारों से आती है।” उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में तार्किक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हों तथा ऐसे बेहतर राष्ट्र की तरफ बढ़ें जिसमें बिना जाति—धर्म के समाज बनें और सामाजिक व मानवीय भावना साकार हो।
सामाजिक कार्यकर्ता दलीप सरावग ने भगतसिंह सहित महान स्वतंत्रता सेनानियों की गांव गांव में प्रतिमा लगाने का आह्वान किया। धर्मवीर जाखड़ ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि वे विचारों के योद्धा थे। उन्होंने जो लिखा, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सौ साल पहले था। उन्होंने ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ को केवल नारा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का घोष बना दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष सरपंच ग्राम पंचायत लालासर गोपाल कस्वां और सह अध्यक्ष पूर्व सरपंच मुलाराम कस्वां ने आभार व्यक्त किया।इस दौरान सहीराम पूनिया, शिशुपाल बुडानिया,मिस्टर चूरू राकेश बेनीवाल, जसवीर गोदारा,मोहन हुड्डा,शहीद भगत सिंह ग्रुप के सुरेन्द्र,शुभकरण सुणिया,विनोद शर्मा, रोहिताश्व कस्वां, देवेन्द्र कस्वां, जयसिंह राठौड़,पवन, राजपाल, नरेन्द्र सुणिया, शुभकरण कस्वां व गांव के युवा, महिला व ग्रामीण मौजूद रहे।
संचालन बेगराज कस्वां ने किया।
इससे पूर्व वीर तेजाजी विकास समिति चूरू के कार्यकर्ताओं ने सर्किट हाउस चूरू के सामने यादविन्द्र सिंह संधू का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
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