स्वतंत्रता सेनानी सैयद अताउल्लाह शाह बुखारी. ब्रिटिश हुकूमत के कट्टर विरोधी
सैयद अताउल्लाह शाह बुखारी का जन्म 23 सितंबर 1892 को पटना में हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वह सहारनपुर जिले के देवबंद में मदरसे से जुड़ गए। सैयद अताउल्लाह शाह बुखारी ने अपने कैरियर की शुरुआत अमृतसर की एक छोटी मस्जिद में एक धार्मिक उद्देशक के रूप में की और लगभग 40 वर्षों तक कुरान की शिक्षा दी। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही अपने भाषणों में उन्होंने गरीबों की दुःख ओर तकलीफ का जिक्र किया, और अपने अनुयायियों से वादा किया कि उनकी परेशानी का अंत ब्रिटिश शासन के अंत के साथ होगा। कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आंदोलन में दिए गए भाषण के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रिटिश अधिकारियों के दृष्टिकोण में अताउल्लाह शाह एक ऐसे व्यक्ति थे, जिनके साथ बातचीत करने से कांग्रेस नेताओं से दूर जेल में बंद रहना बेहतर है। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश विरोध का प्रचार करने में बिताया वह भारत में भारतीय राष्ट्रवादी मुस्लिम राजनीतिक आंदोलन मजलिस-ए-अहरार के संस्थापक पिता भी थे। 1946 में अहरार आंदोलन ने भारत के विभाजन का विरोध प्रस्ताव पारित किया। अताउल्लाह शाह बुखारी एक मुस्लिम हनीफी विद्वान भी थे। वह अपनी वक्तत्व कला के लिए भी जाने जाते थे। और अधिकांश कलाएं फारसी में करते थे। उनकी कविता का संकलन सवती-अल-इलहाम में किया गया है। उनके जीवनी लेखक आगा शोरिश कश्मीरी कहते हैं, की बुखारी का सबसे बड़ा योगदान भारतीय मुसलमानों के बीच ब्रिटिश विरोधी भावनाओं का अनुसरण था। इन्होंने भारत विभाजन के समय पाकिस्तानी नागरिकता ग्रहण की और उनकी मृत्यु 1961 में पाकिस्तान के मुल्तान में हुई।
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