सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता भारत के लिए क्या मायने रखता है?
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता भारत की विदेश नीति की असफलता माना जा रहा है। भारत की सुरक्षा जरूरतों को यदि ध्यान में रखा जाए तो सऊदी अरब और पाकिस्तान का यह सुरक्षा समझौता भारत के लिए नुकसानदायक ही माना जाएगा। वैसे भारत की सैन्य और आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब मिलकर भी भारत को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। फिर भी दीर्घ अवधि में इस समझौते का भारत पर प्रभाव पड़ेगा। सऊदी अरब के भारत से राजनीतिज्ञ, आर्थिक और कूटनीतिज्ञ संबंध अच्छे स्तर पर हैं। जबकि पाकिस्तान भारत का कट्टर दुश्मन देश है। इजरायल और अमेरिका के डर से हुआ सऊदी अरब और पाकिस्तान रक्षा समझौता नाटो समझौता के बाद विश्व का दूसरा ऐसा समझौता है जिसमें पाकिस्तान और सऊदी अरब पर किसी भी देश द्वारा किया गया आक्रमण दोनों देशों पर आक्रमण माना जाएगा और दोनों देश मिलकर उसका मुकाबला करेंगे। पाकिस्तान को सऊदी अरब से हुए रक्षा समझौते के सबसे ज्यादा फायदा दिखाई दे रहा है। इजरायल के आक्रमणों से सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया के मुस्लिम देश परेशान दिखाई दे रहे हैं। इजरायल के सामने मुकाबला करने की किसी भी मुस्लिम देश के पास ताकत नहीं है। ईरान, तुर्की एवं पाकिस्तान ही इजरायल का मुकाबला कर सकते हैं। पाकिस्तान विश्व सैन्य क्षमता के अनुसार 12वा सबसे ताकतवर देश होने के साथ-साथ परमाणु संपन्न देश है। ऐसी स्थिति में सऊदी अरब पर इजरायल और अन्य देश का आक्रमण करना आसान नहीं होगा। सऊदी अरब आर्थिक रूप से धनाडय देशों में शामिल है। जबकि पाकिस्तान परमाणु हथियार संपन्न होने के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर देश है। पाकिस्तान पर आईएमएफ और काफी देश का बड़ा कर्ज है। आर्थिक कमजोरी के कारण पाकिस्तान की विश्व स्तर पर कमजोर इमेज बनी हुई है। दूसरा पाकिस्तान को आतंकवाद का पोषक भी माना जाता है। फिर सऊदी अरब से समझौता के बाद पाकिस्तान में सऊदी अरब और संयुक्त अमीरात की ओर से रेल, सड़क एवं बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश किया जाएगा, पाकिस्तान के सैन्य प्रोजेक्ट जो धन की कमी से बंद पड़े हैं या रुके हुए हैं शुरू हो जाएंगे। पाकिस्तान के मुस्लिम देशों में स्वीकार्यता बढ़ जाएगी। माना जा रहा है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के रक्षा समझौते में जल्दी और मुस्लिम देश जुड़ सकते हैं। तुर्की ने भारत पाकिस्तान युद्ध के समय पाकिस्तान की सैन्य मदद की थी। इसलिए तुर्की पाकिस्तान का सैन्य पार्टनर पहले से ही है। पाकिस्तान ऐसा देश है जो भारत में आतंकवाद फैलाता है, भारत को कमजोर करना चाहता है। अब जबकि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तो वह भारत में आतंकवाद फैलाने में और धन और संसाधन खर्च करेगा। वर्तमान में चीन पाकिस्तान का सहयोगी देश है। इसलिए कहा जा सकता है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान का रक्षा समझौता भारत के लिहाज से ठीक नहीं कहा जा सकता है।
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