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यूनानी चिकित्सा विभाग में यूनानी चिकित्सा अधिकारियों की कोई सुनने वाला नहीं!

जयपुर

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चार साल से डीपीसी का इंतजार, एक साल से दवाईयों का इंतजार, आठ साल से केडर पुनर्गठन का इंतजार,

-2016 में नियुक्त यूनानी चिकित्सा अधिकारीयों को एमएसीपी का इंतजार

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। यूनानी चिकित्सा विभाग में चिकित्सा अधिकारियों की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक पिछले चार साल से नहीं हुई है। मामले को  लेकर चिकित्सा अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों में गहरा असंतोष है। विभागीय यूनानी चिकित्सा अधिकारी संघ राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कादिर हुसैन का कहना है कि आला अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा हमें आर्थिक रूप से उठाना पड़ रहा है, साथ ही पदोन्नति से भी वंचित हैं। जानकारी के अनुसार साल 2022 में करीब एक दर्जन अधिकारियों की डीपीसी होनी थी, जिसमें से गिने-चुने लोगों की ही डीपीसी हो पाई। विभागीय यूनानी चिकित्सा अधिकारी संघ राजस्थान ने करीब तीन साल से विभाग को दर्जनों बार पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से डीपीसी की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके अलावा यूनानी औषधालय और चिकित्सालयों में एक साल पहले दवाईयां भिजवाई गई थी उसके बाद आज तक दवाइंया उपलब्ध नहीं करवाई गई है। 2016 में नियुक्त यूनानी चिकित्सा अधिकारीयों की एमएसीपी के आदेश हो जाने चाहिए थे लेकिन अभी तक इंतजार ही कर रहे हैं। इसी तरह से यूनानी चिकित्सा अधिकारीयों का पुनर्गठन 2017 में हुआ था उसके बाद यूनानी चिकित्सा विभाग में सैकड़ों पदों की बढ़ोतरी हुई है लेकिन आज तक केडर का पुनर्गठन नहीं किया गया है। शासन सचिवालय और विभाग में मालूम करने पर जवाब मिलता है कि हमने फाइल शासन को भिजवा दी है और शासन के यहां से जवाब मिलता है कि आयूर्वेद के साथ ही आप का पुनर्गठन किया जाएगा।जब विभाग अलग अलग है तो काम अलग अलग क्यों नहीं होता है। हमारे शासन सचिव सुबीर कुमार गम्भीर अधिकारी हैं उन्होंने काम न होने पर पहले भी विभागीय अधिकारियों की खिंचाई की थी और यूनानी चिकित्सा विभाग का निदेशक का चार्ज भी शासन उपसचिव सावन कुमार चायल को दिया था लेकिन उसके बावजूद भी अभी तक विभागीय अधिकारियों की तरह ही काम बहुत ज्यादा देरी से हो रहें हैं। डॉ कादिर हुसैन ने कहा कि यही रवैया रखना था तो विभागीय निदेशक ही बना देते।

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