राजस्थान के लाल हवलदार इकबाल अली दुश्मनों से लोहा लेते हुए कुपवाड़ा में शहीद
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। झुंझुनूं के लालपुर गांव के हवलदार इकबाल अली 21 ग्रेनेडियर्स में तैनात थे। कुपवाड़ा में शहीद होने वाले इकबाल ने देश सेवा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उनके शव को श्रीनगर से दिल्ली के रास्ते गांव में पहुंचाया गया है। घटना के बाद इलाके में मातम है, लेकिन उनकी बहादुरी के किस्से हर किसी जुबान पर है। देश के आह्वान पर जवान मौत को भी पीछे छोड़, उसके लिए समर्पित हो जाते हैं। झुंझुनूं के लालपुर गांव के हवलदार इकबाल अली ने कुपवाड़ा की ठंडी वादियों में शहीद होकर साबित कर दिया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए जान कुर्बान कर देना ही सच्चा फर्ज है। आज पूरा गांव उनकी शहादत पर रो रहा है, लेकिन उनकी बहादुरी के किस्से सुनकर यहां के लोगों का सीना फख्र से चौड़ा हो जाता है। शहीद हवलदार इकबाल अली का ताल्लुक राजस्थान के झुंझुनूं जिले के लालपुर गांव से है। देश की आन बान शान के लिए उन्होंने दो दशक तक सरहद पर रहकर सेवा की है और जब जरुरत पड़ी तो अपनी जान कुर्बान कर दी। इकबाल अली जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थे। उनके शहादत की खबर से पूरा गांव शोक में डूब गया। गुरूवार को उनके पैतृक गांव लालपुर में राजकीय सम्मान के साथ शहीद को सुपुर्दे खाक किया जाएगा। हवलदार इकबाल अली 21 ग्रेनेडियर्स में तैनात थे। उनकी पार्थिव शरीर को श्रीनगर से दिल्ली लाया गया, फिर यहां से देर रात काफिला झुंझुनूं उनके गांव पहुंचा। पूरे इलाके में शहीद के सम्मान में तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर अपने योद्धा को आखिरी सलाम पेश किया। इस शहीद इकबाल अली के परिजन, रिश्तेदार, स्थानीय लोगों के साथ सेना के अधिकारी और कई दिग्गज शामिल हुए। मिली जानकारी के मुताबिक, शहीद इकबाल अली के परिवार में उनकी बीवी नसीम बानो, बेटी मायरा और मां जन्नत बानो हैं। परिवार की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। गांव में मातम पसरा है। इकबाल अली ने 15 जनवरी 2003 को देश सेवा के जज्बे के साथ भारतीय सेना की 21 ग्रेनेडियर्स में भर्ती हुए थे। मिली जानकारी के मुताबिक, 3 जुलाई 2025 को वे छुट्टी पर अपने घर आए थे और 20 दिनों की छुट्टी पूरी कर 23 जुलाई को ड्यूटी पर लौट गए थे। उनकी पहली पोस्टिंग पानागढ़, कोलकाता में हुई थी। कुछ दिन पहले ही उन्हें कुपवाड़ा में तैनात किया गया था।
कायमखानी समाज के बहादुरों ने अब तक 400 से ज्यादा सेना मेडल प्राप्त किए-
हवलदार इकबाल झुंझुनू जिले के लालपुर गांव के निवासी थे और उनके परिवार में से कई लोग सेना में रहे हैं। शहीद हवलदार इकबाल खान कायमखानी समाज से आते हैं। राजस्थान का कायमखानी समाज के सैनिक अपनी बहादुरी और वीरता के लिए देशभर में अपनी विशेष पहचान रखते हैं। राजस्थान के कायमखानी फौजियों ने सबसे ज्यादा 6 वीर चक्र, 4 शौर्य चक्र, 20 सेवा मेडल, सहित 400 से ज्यादा मेडल प्राप्त किए हैं। राजस्थान के कायमखानी समाज के लोग सेवा में छोटे से लेकर बड़े पदों तक में अपनी सेवा दी है और दे रहे हैं। शहीद हवलदार इकबाल खान का जिला झुंझुनू तो सैनिकों की फैक्ट्री के नाम से ही पहचाना जाता है। वर्तमान में भी कायमखानी समाज के प्रत्येक परिवार से देश की सेवा करने के लिए फौज में भर्ती होना चाहता है।
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