नसों में झनझनाहट क्यों होती है और इसे दूर करने के घरेलू उपाय
हमारे शरीर में हर छोटी-बड़ी नस (Nerves) का संबंध मस्तिष्क से होता है। जब नसों के बीच का संतुलन बिगड़ता है या रक्त संचार (Blood Circulation) में रुकावट आती है, तो हमें झनझनाहट (Tingling Sensation) का अहसास होने लगता है। यह समस्या अक्सर हाथ, पैर, उंगलियों या तलवों में अधिक महसूस होती है। कई लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार या लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। आइए विस्तार से समझते हैं कि नसों में झनझनाहट क्यों होती है और इसे दूर करने के घरेलू उपाय क्या हैं।
नसों में झनझनाहट के कारण
ब्लड सर्कुलेशन में कमी: जब रक्त सही तरीके से नसों तक नहीं पहुंचता, तो ऑक्सीजन और पोषण की कमी हो जाती है। इससे नसों पर दबाव बढ़ता है और झनझनाहट महसूस होती है।
नर्व्स पर दबाव पड़ना: लंबे समय तक एक ही पॉश्चर में बैठे रहना, जैसे कि पैर पर पैर चढ़ाकर बैठना या हाथ को दबाकर सोना, नर्व्स पर प्रेशर डालता है। इससे झनझनाहट होती है।
विटामिन की कमी: खासकर विटामिन B12 और विटामिन B6 की कमी से नसें कमजोर हो जाती हैं। नतीजतन, नसों में झनझनाहट और कमजोरी महसूस होने लगती है।
डायबिटीज और थायरॉयड: शुगर लेवल असंतुलित होने या थायरॉयड की समस्या होने पर भी नसों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इससे भी यह लक्षण नजर आ सकते हैं।
तनाव और थकान: मानसिक तनाव और शारीरिक थकान से भी नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे हाथ-पैरों में झनझनाहट होने लगती है।
अन्य कारण
ज्यादा शराब पीना
धूम्रपान
चोट लगना या नस दबना
हर्नियेटेड डिस्क या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
घरेलू उपाय
यदि झनझनाहट कभी-कभार होती है, तो आप कुछ घरेलू उपायों से राहत पा सकते हैं:
गर्म पानी से सेंक: हाथ या पैर में झनझनाहट हो रही हो तो तौलिए को गर्म पानी में डुबोकर सेंक करें। गर्माहट से ब्लड फ्लो बेहतर होगा और नसों पर दबाव कम होगा।
हल्की मसाज करें: सरसों या नारियल के तेल से हल्की मसाज करने से नसों में खून का बहाव तेज होता है। मसाज करते समय ज्यादा दबाव न डालें, बल्कि धीरे-धीरे गोल घुमाव में मालिश करें।
अदरक और हल्दी का सेवन: अदरक और हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। यह नसों की सूजन कम करते हैं और झनझनाहट को दूर करने में मदद करते हैं। एक गिलास दूध में हल्दी उबालकर पीना फायदेमंद है। अदरक की चाय दिन में 1-2 बार ले सकते हैं।
योग और स्ट्रेचिंग: नियमित योगासन जैसे ताड़ासन, भुजंगासन और पश्चिमोत्तानासन करने से नसों पर दबाव कम होता है। हल्के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं।
गर्म पानी में नमक डालकर पैर डुबोना: रात को सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक डालकर उसमें पैर डुबोकर बैठने से आराम मिलता है। इससे नसों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं।
विटामिन से भरपूर आहार: दूध, पनीर, अंडा, मछली, दालें और हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन B12 और B6 का अच्छा स्रोत हैं। इनका सेवन नसों को मजबूत बनाता है।
लाइफस्टाइल में सुधार: लंबे समय तक एक ही पोजीशन में न बैठें। रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक करें। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। पर्याप्त नींद लें।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर झनझनाहट – बार-बार होने लगे, लंबे समय तक बनी रहे, साथ में कमजोरी, सुन्नपन, दर्द या जलन भी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यह डायबिटिक न्यूरोपैथी, थायरॉयड, या किसी गंभीर नस संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।
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