युवाओं को मिले एजुकेशन और करियर से जुड़े टिप्स: एक्सपर्ट्स ने दी सही गाइडेंस की अहमियत
हाल ही में जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित सरोकार कार्यक्रम में शिक्षा और करियर गाइडेंस को लेकर अहम चर्चा हुई। इस अवसर पर राइट यूएनआई डायरेक्टर दीपक शर्मा ने युवाओं और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण विचार रखे। उनका कहना था कि शिक्षा का वास्तविक मकसद सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए और न ही इसे व्यवसायिक नजरिए से देखना चाहिए। शिक्षा वही है जो बच्चों को एक अच्छा नागरिक बनाए और उन्हें रोजगार के सही अवसर प्रदान करे।
शिक्षा की नई परिभाषा
दीपक शर्मा ने कहा कि आज शिक्षा की असली परिभाषा यह है कि यह समाज और व्यक्ति दोनों को सभ्य बनाए। किताबों का ज्ञान तभी सार्थक है जब वह इंसान के व्यवहार और सोच में बदलाव लाए। आज की तारीख में माता-पिता और बच्चों के बीच करियर चुनने को लेकर एक बड़ा अंतर है। जहां युवा नई-नई संभावनाओं की तलाश में रहते हैं, वहीं पुरानी पीढ़ी अभी भी पारंपरिक ढर्रे पर सोचती है। यही कारण है कि कई बार बच्चे सही अवसरों तक नहीं पहुंच पाते।
पेरेंट्स की सोच में बदलाव ज़रूरी
उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों को यह समझाना आसान है कि उन्हें क्या करना है, लेकिन उनके पेरेंट्स को समझाना कहीं ज्यादा मुश्किल है। आज समय तेजी से बदल रहा है। आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मार्केटिंग, डाटा साइंस, डिजाइनिंग, होटल मैनेजमेंट, सोशल मीडिया, स्पोर्ट्स और क्रिएटिव आर्ट्स जैसे नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन पेरेंट्स अब भी बच्चों को सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर या गवर्नमेंट जॉब तक ही सीमित करना चाहते हैं।
सही गाइडेंस क्यों है ज़रूरी
दीपक शर्मा ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन बाद में एहसास हुआ कि करियर में सफलता सिर्फ डिग्री लेने से नहीं मिलती। असली फर्क तब पड़ता है जब हमें अपनी क्वालिफिकेशन और रुचि के अनुसार सही फील्ड चुनने का मौका मिलता है। यदि युवाओं को सही समय पर राइट गाइडेंस मिल जाए तो वे न केवल समय बचा सकते हैं बल्कि अनावश्यक खर्च और असफलताओं से भी बच सकते हैं। इसी सोच के चलते उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर बच्चों के करियर मार्गदर्शन का काम शुरू किया। उनका मानना है कि अगर किसी छात्र को उसकी योग्यता और रुचि के अनुसार दिशा दिखाई जाए तो वह अपने लक्ष्य तक जरूर पहुंच सकता है।
शिक्षा और करियर से जुड़े एक्सपर्ट्स की राय
कार्यक्रम में मौजूद अन्य विशेषज्ञों ने भी कुछ अहम बातें रखीं:
करियर काउंसलिंग की अहमियत
– हर छात्र अलग है और उसकी रुचियां भी अलग हैं। इसलिए “वन-साइज-फिट्स-ऑल” अप्रोच से बच्चों का करियर तय नहीं किया जा सकता।
– स्कूलों में करियर काउंसलिंग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए।
स्किल्स पर जोर
– डिग्री लेना ही सफलता नहीं है। आज कंपनियां स्किल्स पर ज्यादा ध्यान देती हैं।
– कम्युनिकेशन स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग, टीम वर्क, डिजिटल स्किल्स और क्रिएटिविटी की मांग बढ़ रही है।
नई एजुकेशन पॉलिसी की भूमिका
– राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बच्चों को लचीला और बहुआयामी शिक्षा देने की दिशा में काम कर रही है।
– इसमें व्यावसायिक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और क्रिएटिव विषयों पर ज्यादा फोकस है।
ग्लोबल अप्रोच
– आज का युग ग्लोबल कनेक्टिविटी का है।
– बच्चों को सिर्फ लोकल ही नहीं बल्कि इंटरनेशनल अवसरों की जानकारी भी दी जानी चाहिए।
युवाओं के लिए करियर टिप्स
अपने इंटरेस्ट को पहचानें – किसी भी करियर का पहला कदम यही है कि आप समझें कि आपको किस काम में मज़ा आता है। राइट गाइडेंस लें – विशेषज्ञों या काउंसलर्स से मिलें और उनकी सलाह लें। स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान दें – साथ में कोई प्रोफेशनल कोर्स या सर्टिफिकेशन करें। टेक्नोलॉजी से जुड़ें – डिजिटल दुनिया की जानकारी रखना आज अनिवार्य है। नेटवर्किंग करें – सही लोगों से जुड़कर नए अवसर तलाशें। प्लान बी तैयार रखें – करियर में हमेशा एक वैकल्पिक योजना होनी चाहिए।
पेरेंट्स के लिए संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पेरेंट्स से भी अपील की कि वे बच्चों की रुचि और टैलेंट को समझें। हर बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन सकता, लेकिन वह अपनी रुचि के अनुसार बेहतरीन करियर बना सकता है। यदि पेरेंट्स बच्चों को सपोर्ट करेंगे तो उनका आत्मविश्वास और बढ़ेगा और वे सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएंगे। आज शिक्षा और करियर का परिदृश्य बहुत बदल चुका है। अब बच्चों के सामने पारंपरिक रास्तों के अलावा कई नए अवसर हैं। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उन्हें सही समय पर राइट गाइडेंस मिले और पेरेंट्स अपनी सोच में बदलाव लाएं। दीपक शर्मा जैसे एक्सपर्ट्स और करियर गाइडेंस संस्थान इसी दिशा में सार्थक प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा तभी सार्थक होगी जब वह बच्चों को सही दिशा दिखाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। आने वाली पीढ़ी तभी आगे बढ़ेगी जब स्कूल, समाज और परिवार मिलकर बच्चों को उनका असली टैलेंट पहचानने का मौका देंगे।
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