इस्लाम में साफ़-सफ़ाई की अहमियत
वही है जिसने मौत और ज़िंदगी को पैदा किया ताकि वह आज़माए कि तुम में सबसे अच्छे अमल वाला कौन है।”
क़ुरआन, सूरह अल-मुल्क 67:2)
क़ुरआन की यह आयत साफ़ करती है कि इंसान की ज़िंदगी का असल मक़सद नेक और बेहतर अमल करना है। लेकिन बेहतर अमल वही है, जिसमें इंसान बाहर से भी पाक (स्वच्छ) हो और भीतर से भी। इसीलिए इस्लाम ने तहारत (पाकीज़गी) को ईमान का हिस्सा क़रार दिया है।
तहारत का मतलब
‘तहारत’ का अर्थ है — गंदगी और नापाकी से पाक होना।
यह गंदगी केवल बाहरी (जैसे बदन या कपड़ों पर मैल) ही नहीं, बल्कि अंदरूनी (दिल और नफ़्स की गंदगी) भी है।
इस्लाम चाहता है कि इंसान हर तरह से पाक हो — ज़ाहिरी भी और बातिनी भी।
बातिनी तहारत (आंतरिक स्वच्छता)
ईमान की पाकीज़गी
क़ुरआन कहता है:
“हमें कोई मुसीबत नहीं आ सकती सिवाय उस के जो अल्लाह ने हमारे लिए लिख दी है।”
(सूरह अत-तौबा 9:51)
एक हदीस में पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया:
“अगर पूरी दुनिया मिलकर तुम्हें फायदा देना चाहे, तो नहीं दे सकती जब तक अल्लाह न चाहे।”
(तिर्मिज़ी 2516)
जब इंसान मुश्किल वक्त में अल्लाह पर भरोसा रखे तो उसका ईमान पाक माना जाता है। इसके विपरीत, जिनका ईमान कमज़ोर होता है, वे छोटी-सी आज़माइश भी सहन नहीं कर पाते। WHO की रिपोर्ट बताती है कि हर साल दुनिया में लगभग 7,20,000 लोग आत्महत्या कर लेते हैं।
दिल की पाकीज़गी
क़ुरआन कहता है: “जिस दिन न माल काम आएगा, न औलाद — सिवाय उसके जो अल्लाह के पास पाक दिल लेकर आएगा।”
(सूरह अश-शु’आरा 26:88-89)
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया: “हसद (जलन) नेक अमल को ऐसे खा जाती है जैसे आग लकड़ी को।” (अबू दाऊद 4903)
हालिया घटनाओं से भी यह साबित होता है कि हसद और बुग़्ज़ (नफरत) समाज में अपराध का कारण बनते हैं। जैसे, 4 दिसम्बर 2024 को दिल्ली में एक युवक ने जलन की वजह से अपने ही माता-पिता और बहन की हत्या कर दी।
घमंड से पाक होना
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया: “वह शख्स जन्नत में दाख़िल नहीं होगा जिसके दिल में राई के दाने के बराबर भी घमंड होगा।”
(सहीह मुस्लिम, हदीस 91)
आधुनिक शोध बताता है कि अहंकार और घमंड की वजह से इंसान के गुस्से में 21% वृद्धि और हिंसा में 18% वृद्धि होती है।
ज़बान की पाकीज़गी
हदीस: “जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता है, वह या तो अच्छी बात कहे या खामोश रहे।”
(सहीह बुखारी 6136)
आज कई अपराध केवल गंदी ज़बान से शुरू होते हैं। 18 जुलाई 2024 को दिल्ली में एक व्यक्ति ने होटल स्टाफ को अपमानजनक शब्दों के कारण गोली मार दी। यह उदाहरण बताता है कि ज़बान की गंदगी किस हद तक विनाशकारी हो सकती है।
नफ़्स की पाकीज़गी
क़ुरआन कहता है: “कामयाब है वह जिसने अपने नफ़्स को पाक किया और नाकाम रहा जिसने उसे गंदा कर लिया।” (सूरह अश-शम्स 91:9-10)
नफ़्स की गंदगी ही इंसान को अपराध की तरफ़ धकेलती है। भारत में वर्ष 2022 में लगभग 31,000 बलात्कार के मामले दर्ज हुए — यह आंकड़ा बताता है कि नफ़्स पर क़ाबू पाना कितना ज़रूरी है।
ज़ाहिरी तहारत (बाहरी स्वच्छता)
बदन की सफ़ाई
इस्लाम में वुज़ू और ग़ुस्ल का आदेश इंसान को हमेशा पाक और साफ़ रखने के लिए है।
कपड़ों की सफ़ाई
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया: “सफेद कपड़े पहना करो, ये तुम्हारे कपड़ों में सबसे अच्छे हैं।” (सुनन अबू दाऊद 4061)
सफेद कपड़े गंदगी को जल्दी दिखा देते हैं और इंसान को साफ-सुथरा रखने की आदत डालते हैं।
जगह की सफ़ाई
पैग़म्बर ﷺ ने फ़रमाया: “अल्लाह पाक है और पाकी को पसंद करता है। अपने आंगन और गलियों को साफ़ रखा करो।” (तिर्मिज़ी 2799)
एक और हदीस में चेतावनी दी गई: “उन दो चीज़ों से बचो जो लोगों की लानत का कारण बनती हैं — रास्तों और छांव की जगह पर गंदगी करना।” (सहीह मुस्लिम 269/5705)
सोचिए, अगर अल्लाह पूछे: “तुम्हारे मोहल्ले में गंदगी क्यों थी, तुमने सफ़ाई क्यों नहीं की?” तो इंसान क्या जवाब देगा?
इस्लाम केवल इबादत का नाम नहीं, बल्कि पाकीज़गी और साफ़-सफ़ाई का पूरा निज़ाम है।
जो अपने बदन, कपड़ों और जगह को साफ़ रखता है और
अपने ईमान, दिल, ज़बान और नफ़्स को पाक रखता है,
वही अल्लाह का सच्चा बंदा कहलाता है।
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