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आजाद हिंद फौज की स्थापना

jaipur

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आजाद हिंद फौज, जिसे भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) के नाम से भी जाना जाता है, की स्थापना सुभाष चंद्र बोस ने 1 सितंबर 1942 में दक्षिण पूर्व एशिया में की थी। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत से पहले जापान और दक्षिण पूर्व एशिया निर्वासित भारतीय राष्ट्रवादियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रय स्थल थे। उसी समय जापान ने मलायी सुलतानों, विदेशी चीनी समुदाय, बर्मी प्रतिरोध और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से समर्थन प्राप्त करने के लिए, विशेष रूप से मेजर इवाइची फुजिवारा के नेतृत्व में दक्षिण एशिया में खुफिया मिशन भेजे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सन 1942 में जापान की सहायता से टोक्यो में भारत को अंग्रेजों के कब्जे से स्वतंत्र कराने के लिए आजाद हिंद फौज या इंडियन नेशनल आर्मी (INA) नामक सशस्त्र सेना का गठन हुआ। इस सेना के गठन में कैप्टन मोहन सिंह, रासबिहारी बॉस एवं निरंजन सिंह गिल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजाद हिंद फौज की स्थापना का विचार सर्वप्रथम मोहन सिंह के मन में आया था। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस सहित उनके सभी सहयोगियों ने जापान की सहायता से भारतीय युद्ध बंदियों और प्रवासी भारतीयों को एकत्रित किया। बोस ने 1943 में आईएनए का नेतृत्व संभाला और इसे एक शक्तिशाली सैन्य बल में बदल दिया। आजाद हिंद फौज का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त करना था। बॉस ने अपने अनुयायियों को “जय हिंद” का अमर नारा दिया और 21 अक्टूबर 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थाई सरकार “आजाद हिंद सरकार” की स्थापना की। नेताजी की आईएनए ने जापान के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। आजाद हिंद फौज की संरचना में कई इकाइयाँ शामिल थीं, जिनमें से कुछ प्रमुख थीं, महिला रेजिमेंट जिसे झांसी रानी रेजिमेंट भी कहा जाता था, इसकी कमान लक्ष्मी सहगल को सौंपी गई थी। इन्फैंट्री रेजिमेंट इसमें कई बटालियन शामिल थीं जिन्होंने ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिनमें से कुछ प्रमुख थीं। इम्फाल की लड़ाई यह लड़ाई 1944 में हुई थी और इसमें आईएनए ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अन्य लड़ाइयाँ आईएनए ने कई अन्य लड़ाइयों में भी भाग लिया, जिनमें ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी गई। आजाद हिंद फौज की विरासत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण है। इसने भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आजाद हिंद फौज की स्थापना और इसके कार्यों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी। सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आईएनए ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। सिंगापुर के एस्प्लेनेड पार्क में आजाद हिंद फौज के गुमनाम शहीदों की याद में “आईएनए वार मेमोरियल” बनाया हुआ है।

 

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