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पटना में सियासी संग्राम: राहुल गांधी की यात्रा में PM को गाली

पटना

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बीजेपी-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में हिंसक टकराव

पटना, दरभंगा।  बिहार की राजधानी पटना शुक्रवार को राजनीति के सबसे गरम मुद्दे का केंद्र बन गई। मामला राहुल गांधी की “वोटर अधिकार यात्रा” से जुड़ा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माताजी के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इस घटना ने बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आमने-सामने ला दिया। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच जमकर लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले।

घटना कैसे शुरू हुई

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह बीजेपी कार्यकर्ता पटना स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे। वे राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कुछ देर तक माहौल सामान्य रहा, लेकिन जैसे ही कांग्रेस कार्यकर्ता भी बाहर आए और उन्होंने जवाबी नारेबाजी शुरू की, विवाद हिंसक टकराव में बदल गया। मौके पर हालात बिगड़ते ही दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला करना शुरू कर दिया। इस दौरान कई गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पुलिस की भूमिका

बवाल बढ़ता देख पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। पहले उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को खदेड़ा, ताकि कांग्रेस और बीजेपी गुटों को अलग किया जा सके। इसके बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता वहीं धरने पर बैठ गए और सड़क जाम कर दिया। लगभग आधे घंटे तक सड़क पर बैठकर उन्होंने नारेबाजी की। बाद में पुलिस ने उन्हें भी वहां से हटाकर जाम खुलवाया।

आरोपी की गिरफ्तारी

इस पूरे विवाद की जड़ दरभंगा जिले से जुड़ी बताई जा रही है। दरभंगा पुलिस ने गुरुवार देर रात रिजवी उर्फ राजा नामक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के भपुरा गांव का रहने वाला है और पिकअप ड्राइवर के रूप में काम करता है। पुलिस का कहना है कि इसी युवक ने राहुल गांधी की यात्रा के दौरान मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माताजी के लिए अपशब्द कहे थे।

अमित शाह का तीखा बयान

मामले पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि — “राहुल गांधी की यात्रा में पीएम मोदी की माताजी के लिए अपशब्द बोलकर कांग्रेस ने सबसे घृणित काम किया है। जिस प्रकार की राजनीति राहुल गांधी ने शुरू की है, वह हमारे सार्वजनिक जीवन को ऊंचाई नहीं देगी। यह आज की बात नहीं है, नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं तब से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मणिशंकर अय्यर जैसे नेता बार-बार गालियां देते रहे हैं।”

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राहुल गांधी का जवाब

राहुल गांधी ने घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा—
“सत्य और अहिंसा के आगे असत्य और हिंसा टिक ही नहीं सकते। मारो और तोड़ो, जितना मारना-तोड़ना है – हम सत्य और संविधान की रक्षा करते रहेंगे। सत्यमेव जयते।” राहुल ने अपने संदेश में हिंसा की राजनीति को नकारते हुए खुद को संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के पक्ष में खड़ा दिखाने की कोशिश की।

नीतीश कुमार ने जताई नाराज़गी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने X पर लिखा—
“यह घटना अत्यंत अशोभनीय है। मैं इसकी निंदा करता हूं।” उनका बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन अभद्र भाषा और हिंसा की राजनीति लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

बढ़ता राजनीतिक तनाव

इस घटना ने बिहार की सियासत में नया उबाल ला दिया है। जहां बीजेपी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोल रही है, वहीं कांग्रेस इसे बीजेपी की साजिश बताकर अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों के बीच बढ़ती तल्खी का असर आने वाले चुनावी माहौल पर भी साफ दिखेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि पीएम मोदी की मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल आम जनता की भावनाओं को चोट पहुंचा सकता है। बीजेपी इस मुद्दे को जनता के बीच भुनाने की पूरी कोशिश करेगी। दूसरी ओर कांग्रेस इसे “सत्य बनाम असत्य” और “अहिंसा बनाम हिंसा” की लड़ाई बताकर नैतिक ऊंचाई लेने का प्रयास कर रही है। पटना की सड़कों पर हुआ यह सियासी टकराव केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीति के बिगड़ते मिजाज का आईना है। नेताओं के भाषणों में बढ़ती कटुता और अपशब्दों का इस्तेमाल देश की लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चुनौती देता है। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे अपने विरोध को लोकतांत्रिक तरीकों से प्रकट करें, न कि हिंसा और अभद्र भाषा का सहारा लें। इस घटना से साफ है कि बिहार की सियासत आने वाले दिनों में और गरम होगी। बीजेपी इस मुद्दे को राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला करने के बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करेगी, वहीं कांग्रेस इसे “संविधान बचाने” की लड़ाई बनाकर पेश करेगी। लेकिन असली सवाल यही है— क्या जनता इन राजनीतिक झगड़ों से ऊपर उठकर अपने असली मुद्दों पर ध्यान दिला पाएगी?

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