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ट्रम्प सलाहकार का विवादित बयान : यूक्रेन जंग को बताया “मोदी वॉर”

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भारत पर रूस-चीन से नजदीकी का आरोप

वॉशिंगटन डीसी (एजेंसी) । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। नवारो ने यूक्रेन जंग को सीधे भारत से जोड़ते हुए इसे “मोदी वॉर” तक कह दिया। बुधवार को ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में नवारो ने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन करता है और ऊंची कीमत पर बेचता है। इस प्रक्रिया से रूस को युद्ध के लिए आवश्यक आर्थिक मदद मिलती है और वह यूक्रेन पर लगातार हमले करता जा रहा है। नवारो ने साफ शब्दों में कहा कि भारत का यह रवैया न केवल यूक्रेन जंग को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी खतरा है। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है, क्योंकि भारत अब तक खुद को “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर चलने वाला देश बताता रहा है।

भारत पर ‘दोहरा खेल’ खेलने का आरोप

नवारो ने अपने इंटरव्यू में भारत पर डबल स्टैंडर्ड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत पश्चिमी देशों से दोस्ती का दावा करता है, वहीं रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे आर्थिक रूप से मजबूत भी करता है।

उनके शब्दों में: “भारत रूस से सस्ता तेल खरीदता है, उसे रिफाइन करता है और फिर ऊंची कीमत पर दुनिया को बेचता है। इससे रूस को युद्ध के लिए पैसा मिलता है और वही पैसा यूक्रेन के खिलाफ हथियारों में बदल जाता है।” नवारो ने इस तर्क से यह साबित करने की कोशिश की कि भारत के कारोबारी फैसले अप्रत्यक्ष रूप से रूस को ताकत दे रहे हैं।

“तानाशाहों के साथ खड़े हो रहे हो”

नवारो ने अपने बयान में भारत को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि रूस और चीन के साथ नजदीकियां दुनिया के लिए खतरनाक हैं। उन्होंने कहा – “भारत, तुम तानाशाहों के साथ खड़े हो रहे हो। चीन ने अक्साई चिन और तुम्हारे कई इलाके पर कब्जा कर लिया। रूस? जाने भी दो। ये तुम्हारे असली दोस्त नहीं हैं।” इस टिप्पणी से नवारो ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि भारत को अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने चाहिए, न कि रूस और चीन जैसी ताकतों पर भरोसा करना चाहिए।                            यह न्यूज़ भी देखे : https://www.facebook.com/share/p/19e4MKc1vp/

सौदे बंद करो, तो टैरिफ हटेगा

नवारो ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ का बोझ भारत को तब तक झेलना होगा, जब तक वह रूस से तेल की खरीदारी बंद नहीं करता। उन्होंने कहा – “अगर भारत आज रूस से तेल के सौदे बंद कर दे, तो कल ही अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ हटा सकता है।” इस बयान से साफ है कि ट्रम्प कैंप भारत पर आर्थिक दबाव डालने की रणनीति बना रहा है।

भारत की ऊर्जा ज़रूरतें और पश्चिम की राजनीति

भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद रहा है। भारत एक बड़ी जनसंख्या और विकासशील अर्थव्यवस्था वाला देश है, जहां सस्ती ऊर्जा की भारी ज़रूरत है। ऐसे में रूस से मिलने वाला रियायती तेल भारत के लिए फायदेमंद साबित होता है। लेकिन पश्चिमी देशों का तर्क है कि यह खरीद-फरोख्त रूस को युद्ध के लिए धन मुहैया कराती है। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोप बार-बार भारत पर दबाव बनाते हैं कि वह रूस से दूरी बनाए।

ट्रम्प कैंप की राजनीतिक रणनीति

यह बयान केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जुड़ा है। डोनाल्ड ट्रम्प और उनके सहयोगी राष्ट्रपति चुनाव 2024 के लिए आक्रामक रणनीति बना रहे हैं। ट्रम्प चाहते हैं कि वे मौजूदा प्रशासन से अलग और कठोर नजर आएं। भारत जैसे बड़े बाजार और उभरती ताकत पर दबाव डालना ट्रम्प की नेगोशिएशन स्ट्रैटेजी का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका अक्सर व्यापारिक समझौतों और टैरिफ का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर करता है।

भारत के लिए संदेश

नवारो का बयान भारत के लिए स्पष्ट संदेश है कि अगर वह पश्चिमी दुनिया का भरोसा कायम रखना चाहता है तो उसे रूस-चीन से सावधानी बरतनी होगी। हालांकि, भारत ने बार-बार कहा है कि वह “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति पर चलता है और किसी एक ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। भारत का मानना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से ही फैसले लेगा, चाहे वह अमेरिका हो, रूस हो या चीन।

नतीजा

पीटर नवारो का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश है। “मोदी वॉर” जैसे शब्द का इस्तेमाल भारतीय कूटनीति और छवि पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, यह भी सच है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला अकेला देश नहीं है, बल्कि कई यूरोपीय राष्ट्र भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या अमेरिका भारत पर दबाव बढ़ाता है या भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहता है। लेकिन इतना तय है कि नवारो के बयान ने भारत-अमेरिका संबंधों में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले चुनावों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।

 

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