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भारत पर ट्रम्प का 50% टैरिफ बुधवार से लागू

नई दिल्ली

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-अमेरिका में भारतीय ज्वेलरी-कपड़ों की डिमांड 70% घट सकती है

नई दिल्ली (एजेंसी)। 27 अगस्त से अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर 50% टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम भारत के लिए बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है, क्योंकि इसका सीधा असर लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के निर्यात पर पड़ेगा। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट बताती है कि इस नए टैरिफ से भारत के कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी, फर्नीचर और सी-फूड जैसे उत्पाद अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। नतीजा यह होगा कि भारतीय उत्पादों की मांग 70% तक घट सकती है और हमारी कंपनियों की अमेरिकी बाज़ार में हिस्सेदारी बुरी तरह प्रभावित होगी।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार | यह भी पढ़े : https://www.facebook.com/share/p/1AVyeXKDH9/

भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है। टेक्सटाइल, हीरे-ज्वैलरी, ऑर्गेनिक केमिकल्स, दवाइयाँ, फर्नीचर और सी-फूड जैसे उत्पादों की बड़ी मात्रा अमेरिका को भेजी जाती है। अकेले जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर भारत से अमेरिका को लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट करता है। इसी तरह कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स का भी बड़ा हिस्सा अमेरिकी मार्केट पर निर्भर है। ऐसे में 50% टैरिफ का मतलब है कि अमेरिकी ग्राहक इन भारतीय प्रोडक्ट्स को महंगे दामों पर खरीदेंगे। जबकि चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे देश कम टैरिफ के कारण सस्ते दामों पर वही सामान उपलब्ध कराएंगे।

भारतीय उद्योगों पर संभावित असर

कपड़ा उद्योग – भारत का टेक्सटाइल सेक्टर पहले से ही चीन और वियतनाम की सस्ती मैन्युफैक्चरिंग से दबाव झेल रहा है। अब टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी और घट सकती है। जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर – हीरे और गोल्ड ज्वैलरी की मांग अमेरिका में हमेशा से अधिक रही है। लेकिन 50% टैरिफ से अमेरिकी ग्राहक भारतीय प्रोडक्ट्स की बजाय मेक्सिको या थाईलैंड से खरीदारी करना पसंद करेंगे। सी-फूड और फर्नीचर – इन दोनों सेक्टरों को भी सीधा नुकसान होगा, क्योंकि अमेरिका में पहले से ही वियतनाम और इंडोनेशिया के प्रोडक्ट्स सस्ते दाम पर बिक रहे हैं। रोज़गार पर असर – निर्यात घटने से लाखों मज़दूरों और छोटे कारोबारियों पर संकट आ सकता है। ज्वैलरी और टेक्सटाइल सेक्टर ही करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देता है।

भारत के लिए चुनौतियाँ

अमेरिका पर निर्भरता – भारत का बड़ा निर्यात हिस्सा अमेरिका पर निर्भर है। इस स्थिति में टैरिफ बढ़ने से हमारी निर्यात रणनीति कमजोर हो जाती है। प्रतिस्पर्धा में कमी – जब चीन, वियतनाम, बांग्लादेश और मेक्सिको जैसे देशों पर इतना भारी टैरिफ नहीं लगाया जाएगा, तो भारतीय प्रोडक्ट्स अपने आप महंगे होकर कम प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। डॉलर की आमद में कमी – निर्यात घटने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा और रुपया कमजोर हो सकता है।

क्या हैं भारत के विकल्प?

नई बाज़ार रणनीति – भारत को यूरोप, मध्य एशिया, अफ्रीका और खाड़ी देशों में नए बाजार तलाशने होंगे, ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम की जा सके। FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) पर जोर – भारत को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और खाड़ी देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते जल्द से जल्द पूरे करने होंगे। विविधता लाना – केवल ज्वैलरी और टेक्सटाइल पर निर्भर रहने की बजाय भारत को इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देना होगा। अमेरिका से कूटनीतिक बातचीत – भारत को उच्च स्तरीय कूटनीति का सहारा लेकर अमेरिका को यह समझाना होगा कि ऐसे टैरिफ दोनों देशों के रिश्तों और आपसी व्यापार को नुकसान पहुंचाएंगे। ट्रम्प सरकार के 50% टैरिफ से भारत के निर्यात क्षेत्र पर बड़ा असर पड़ना तय है। कपड़े, जेम्स-ज्वैलरी और सी-फूड जैसे पारंपरिक सेक्टरों को तगड़ा झटका लगेगा। यह न सिर्फ भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाज़ार में हिस्सेदारी घटाएगा बल्कि रोज़गार और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी नकारात्मक असर डालेगा।

भारत के सामने अब दो ही रास्ते हैं –
एक तरफ वह अमेरिका से कूटनीतिक बातचीत कर राहत की कोशिश करे और दूसरी तरफ अपने निर्यात को विविध बनाकर नए बाज़ारों की तलाश करे। अगर भारत समय रहते इन कदमों को नहीं उठाता, तो आने वाले महीनों में यह टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।

 

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