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शिक्षा की अलख जगाने वाले प्रमुख बैरिस्टर बदरुद्दीन तैयब जी

Jaipur

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पुण्यतिथि पर विशेष….

बदरुद्दीन तैयब जी का जन्म 10 अक्टूबर 1844 ईस्वी को बम्बई में एक बोहरा परिवार में हुआ था। उनके पिताजी उस ज़माने में भी सभी बच्चों को इंग्लिश शिक्षा के हिमायती थे।  प्रारंभिक उर्दू शिक्षा, पर्सियन एवं कॉलेज की शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए वो लंदन चले गए। बदरुद्दीन तैयब जी एक प्रसिद्ध बैरिस्टर देशहित कार्यकर्ता व प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ थे। तैयब जी सन 1867 में बम्बई उच्च न्यायालय में ब्रिटिश शासन के समय पहले भारतीय बैरिस्टर थे, जिन्होंने वहां प्रैक्टिस शुरू की थी। वह सन 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीसरे अध्यक्ष 1887-88 तक रहे। वो 1875 से 1905 तक बम्बई विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य और (1882-86) तक बम्बई विधान परिषद के भी सदस्य रहे। वो सभी धर्मों में समानता, भाईचारा व मिलजुल कर प्रगति करने व कार्य करने के पक्षधर थे। उन्होंने मुसलमानों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बम्बई में 1874 ईस्वी में अंजुमन -ए-इस्लाम कॉलेज की स्थापना की। जो आज एक बड़ा शिक्षण संस्थान बन चुकी है। उन्होंने इस्लाम जिमखाने की भी स्थापना की जिसके जरिये मुस्लिम समाज भी सामाजिक तौर पर आगे बढ़े और सशक्त हो। सन 1895 में बदरुद्दीन तैयब जी बम्बई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किये गए। वो पहले भारतीय थे। जो अंग्रेज़ी शासन काल मे इतने उच्च पदों पर नियुक्त किये गए थे। सन 1902 में वो बम्बई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए थे। तैयब जी महिला शिक्षा के भी हिमायती थे। वो “जनाना सिस्टम” जो मुसलमानों में प्रचलित था, उसके  पक्ष में नही थे। उन्होंने अपनी सभी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाई ओर उन्हें पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेजा।  19 अगस्त को 1906 को अचानक ह्रदय गति रुक जाने से इस महान शख्सियत का इंतकाल हो गया। उनके द्वारा किये गए कार्य हमेशा याद किये जाएंगे।

 

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