एसडीपीआई बारां इकाई ने मनाया बड़ी धूमधाम से स्वतन्त्रता दिवस
बारां (रॉयल पत्रिका)। एसडीपीआई द्वारा 79वां स्वतंत्रता दिवस अंजुमन चौराहे पर मनाया गया। स्वतन्त्रता दिवस प्रोग्राम का आगाज जिलाध्यक्ष अब्दुल अजीज अज्जू भाई ने झंडारोहण करके किया जिसमें प्रदेश कोषाध्यक्ष जाकिर रंगरेज ने अपने सम्बोधन में कहा कि 15 अगस्त 1947 को हमारा भारत देश आज़ाद हुआ। आज़ाद भारत का धर्मनिरपेक्ष संविधान बना। आजादी के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की के आयाम स्थापित किए। आजादी के बाद जो नारा दिया जय जवान जय किसान इस नारे को हमारे देश के किसानो ने सार्थक साबित किया। हमारे देश जवान सैनिक आज भी सरहद पर देश कि हिफ़ाज़त के लिये अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात पहरा देते है। आज हम भारत वासी यह संकल्प ले कि हम हमारे देश कि एकता आपसी सोहार्द बनाये रखेंगे। हमारे देश कि उन्नति तरक्की विकास में हम हमेशा सहयोग करते रहेंगे। स्वतन्त्रता दिवस प्रोग्राम को अंजुमन इत्तेहादे बहामी के तहसील सदर अलीम मंसूरी, पार्षद असलम अंसारी ने भी संबोधित किया। ज़िला उपाध्यक्ष शहादत अन्सारी ने 79वें स्वतन्त्रता दिवस मे शामिल हुये सभी कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा किया। प्रोग्राम में ज़िलाध्यक्ष अब्दुल अजीज शहादत हुसैन, इफ़्तिखार अहमद, जाकिर रंगरेज, अलीम मंसूरी, इरशाद अंसारी, गुलशेर अहमद, हाजी वहीद चने वाले, कदीर मामाजी, वसीम शैख, अशफ़ाक खान, पार्षद असलम, कालु, रिंकू मन्सुरी, नाज़िश अंसारी सहित अन्य एसडीपीआई के कार्यकर्ता व समर्थक उपस्थित रहे। वोट चोरी, फर्जी वोट लिस्ट, ईवीएम हैकिंग एवं मनमान चुनावी परिणामों देने चुनाव आयोग देश के लोकतंत्र को कमजोर करने पर तुला हुआ है। कोई व्यक्ति, राजनीतिक दल, संस्था यदि चुनाव आयोग की कमजोरी ढूंढता है तो चुनाव आयोग उसी से जवाब मांगने लग जाता है। चुनाव आयोग किसी भी शिकायत की जांच करने में रुचि नहीं लेता है। कई बार तो चुनाव आयोग ऐसे ऐसे हास्यपद दलित देता है जो चुनाव आयोग के पक्षपाती होने की और संकेत करता है। अब तो कई दल चुनाव आयोग पर फर्जी तरह से वोट जोड़ने और घटाने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फर्जी और जोड़ने और हटाने के ठोस सबूत दे दिए हैं फिर भी चुनाव आयोग कोई कार्यवाही करने को तत्पर नहीं दिखाई दे रहा है। आखिर सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग को हटाए गए और जोड़े गए वोटो की पूरी लिस्ट वेबसाइट पर डालने का आदेश दिया है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग की साख देश की जनता की नजर में काफी नीचे आ गई है। वोट की चोरी लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। चुनाव आयोग में अयोग्य चुनाव आयुक्त बैठे हुए हैं। जो चुनाव प्रक्रिया की पूरी तरह मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहे हैं। चुनावों में किसी भी तरह की धंधली को नहीं रोक पाना चुनाव आयोक्तों का बड़ा अपराध है। जिसकी सजा उसको मिलनी चाहिए।
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