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मुगल सम्राट हुमायूं ने रखी राजपूत रानी कर्णावती की राखी की लाज 

Jaipur

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हिन्दू – मुस्लिम की बातें बेबुनियाद

सन 1527 में खानुआ की लड़ाई मुगलों से लड़ते हुए राणा सांगा गंभीर रूप से घायल हुए, कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। राणा सांगा को मृत्यु के बाद मेवाड़ पर गुजरात के मुस्लिम शासक बहादुर शाह ने आक्रमण किया। आक्रमण की जानकारी पहले से मिलने के कारण राणा सांगा की पत्नी कर्णावती ने मुगल शासक हुमायूं को एक चिट्ठी और राखी भेजी। कर्णावती ने हुमायूं से राखी और बहन का हवाला देते हुए, मेवाड़ और बहन की रक्षा करने की प्रार्थना की। रानी कर्णावती ने राजपूत राणाओं से भी मदद मांगी। परंतु कोई मदद के लिए तैयार ना हुआ। जब कर्णावती ने हुमायूं को चिट्ठी भेजी थी, उस वक्त वो ग्वालियर में था और बंगाल पर आक्रमण की तैयारी कर रहा था। उसने  कर्णावती के पत्रवाहक से कहा “अपनी रानी साहिबा से कहिएगा कि वह अपना हौसला बनाए रखें, मैं जल्द ही अपनी सेना लेकर चित्तौड़ पहुंच रहा हूं।” लेकिन जब तक हुमायूं की सेना मेवाड़ पहुंची तब तक बहादुर शाह ने पहले ही आक्रमण कर दिया और रानी कर्णावती ने जौहर करके अपनी जान दे दी। यह खबर सुनकर हुमायूं को बहुत दुख हुआ। हुमायूं ने बहन कर्णावती की राखी की लाज को रखते बहादुर शाह को चित्तौड़ से मार भगाया और चित्तौड़ का सिंहासन कर्णावती और राणा सांगा के बड़े बेटे विक्रमादित्य के हवाले कर दिया। यदि उस समय हिंदू-मुस्लिम होता, तो हुमायूं क्यों दूसरे मुस्लिम शासक से युद्ध लड़ता? और क्यों अपनी हिंदू बहन और राणा सांगा की पत्नी कर्णावती के बेटे को मेवाड़ की गद्दी पर बैठाता। इसलिए कहा जा सकता है कि वर्तमान में हिंदू-मुस्लिम के बीच जो नफरत का बीज बोया जा रहा है यह सिर्फ राजनीति और कुर्सी पाने की लड़ाई है।

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