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भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख सिपहसलार उबैदुल्लाह सिंधी

Jaipur

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पुण्यतिथि 21 अगस्त पर विशेष…

उबैदुल्लाह सिंधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के राजनीतिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने अंग्रेजों से भारत की आजादी और भारत में एक शोषण मुक्त समाज के लिए संघर्ष किया था। 10 मार्च 1872 को सियालकोट (पंजाब) मैं एक सिख घराने में एक लड़के ने जन्म लिया। उनके जन्म से 4 महीने पहले ही उनके पिता की मौत हो गई थी। जब उन्होंने होश संभाला तो मां ने उन्हें पढ़ने के लिए मामा के पास (सिंध) भेज दिया, वहां उनकी मुलाकात कई फकीरों से और सूफियों से हुई। सूफियों की तालीम उन्हें इस्लाम की ओर खींचती रही जिससे उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया तथा अपना नाम ओबेदुल्ला रखा। मौलाना उबैदुल्लाह राजा महेंद्र प्रताप की प्रवासी सरकार में होम मिनिस्टर की हैसियत से थे उन्होंने अफगान अमीर को ब्रिटिश भारत के खिलाफ युद्ध करने का प्रस्ताव दिया। मौलाना 1917 में रूस को रवाना हो गए तथा वहां रूस की क्रांति ने उनके मन में इंकलाब ला दिया। रूस से तुर्की तथा तुर्की से मक्का जाकर 10 साल तक पढ़ने और पढ़ाने का काम किया। लेकिन उनके दिल में एक कसक थी वतन लौटने की पर वतन लौटना आसान नहीं था आखिर में 1936 में कांग्रेस की मदद से परमिशन मिली और वह कराची लौट आए। मौलाना कभी कांग्रेस के मेंबर नहीं रहे पर हमेशा उनकी विचारधारा के आसपास रहे वतन के हालात को देखते हुए अंग्रेजों के खिलाफ गांधीजी के अहिंसा के हथियार को सही मानते थे। वह चाहते थे कि अंग्रेज भारत में ना रहे बल्कि भारत में शासन भारतीयों द्वारा किया जाए ऐसी भावनाओं को मन में रखते हुए उनका देहांत 21 अगस्त 1944 को रहीम यार खान में हुआ।

 

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