शराब: एक ऐसा ज़हर जो दुनिया और आखिरत दोनों को बर्बाद करता है
क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी चीज़ है जिसने लाखों ज़िंदगियाँ तबाह कर दी हैं?
एक ऐसा नशा जो न सिर्फ़ इंसान की सेहत और समाज को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उसकी आख़िरत को भी बर्बाद कर देता है। यह चीज़ है — शराब।
आज शराब को फिल्मों, विज्ञापनों और समाज में इतने हाई स्टैण्डर्ड तरीके से पेश किया जाता है कि लोग इसे अमीरों और कूल लोगों की पहचान समझ बैठते हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। क्योंकि यही शराब है जिसे अल्लाह तआला ने हराम करार दिया और जिसे शैतानी काम कहा।
शराब के बारे में कुरआन का हुक्म
सूरह अल-मायदा (5:90-91) में अल्लाह फरमाते हैं: “ऐ ईमान वालो! शराब, जुआ, बुत, और तीरों से किस्मत निकालना – ये सब शैतान के गंदे काम हैं, इनसे बचो ताकि तुम्हें सफलता मिल सके।”
सूरह अल-बक़रह (2:219) में अल्लाह तआला ने शराब के बारे में फ़रमाया: “उनसे शराब और जुए के बारे में पूछते हैं। कह दो, इनमें बड़ा गुनाह है, और कुछ फ़ायदे भी हैं, मगर इनका गुनाह उनके फ़ायदे से ज़्यादा है।”
शराब कैसे बनती है और नशा कैसे पैदा होता है?
शराब सिर्फ़ एक पेय नहीं, बल्कि एक खतरनाक केमिकल प्रोसेस का नतीजा है।
हदीस से सबूत: रसूलुल्लाह ﷺ के लिए किशमिश को पानी में भिगोया जाता था, जिसे “नबीज़” कहते हैं। आप ﷺ उसे तीन दिन तक पीते थे, उसके बाद या तो किसी को पिला देते थे या फेंक देते थे।
क्यों?
क्योंकि 3 दिन के बाद जब फल की शुगर अधिक हो जाती है, तो उस पर एक सूक्ष्म जीव — यीस्ट (खमीर) हमला करता है।
यीस्ट जब फल की शुगर को खाता है, तो उसके दो नतीजे निकलते हैं: कार्बन डाई ऑक्साइड, अल्कोहल (शराब)
यही प्रोसेस किसी भी शराब को बनाता है। यह वो बुनियादी केमिस्ट्री है जो फल को नशा बनाने वाली चीज़ में तब्दील कर देती है।
शराब शरीर पर क्या असर डालती है?
दिमाग पर असर:
शराब खून में मिलकर दिमाग तक सबसे पहले पहुंचती है।
दिमाग में दो तरह के केमिकल मैसेंजर होते हैं: एक्टिव करने वाले (जैसे Glutamate), धीमा करने वाले (जैसे GABA)
शराब इन दोनों सिस्टम्स को उल्टा कर देती है, जिससे इंसान को नशा, शांति और बेहोशी सी महसूस होती है — मगर यह एक झूठा और खतरनाक सुकून होता है।
नतीजे: याद्दाश्त कमजोर होना, गुस्से पर काबू न रहना, उदासी और डिप्रेशन, फैसले लेने की ताकत का खत्म हो जाना
शराब लीवर को कैसे बर्बाद करती है?
लीवर पर शराब का असर चार खतरनाक चरणों में होता है: Fatty Liver (चर्बी जमा होना), Hepatitis (सूजन आना), Fibrosis (ज़ख्म पड़ना), Cirrhosis (लीवर सख्त और नाकाम होना)
यदि इंसान पहले चरण में शराब छोड़ दे, तो ठीक हो सकता है। लेकिन आख़िरी चरण तक जाते-जाते इंसान को अस्पताल और भारी बिल दोनों का सामना करना पड़ता है।
WHO की रिपोर्ट के अनुसार: “चाहे आप एक घूंट ही पिएं, नुक़सान उसी वक़्त शुरू हो जाता है।”
आखिरत में शराब का अंजाम
हदीस (इब्न माजा: 3381) में रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “अल्लाह ने शराब पर, शराब निकालने वाले पर, उसे निचोड़ने वाले पर, पीने वाले पर, पिलाने वाले पर, बेचने वाले पर, खरीदने वाले पर, उसे ढोने वाले पर और जिसको उठाकर दी जाए — उन सब पर लानत भेजी है।”
एक और हदीस (इब्न माजा: 3371): “शराब तमाम बुराइयों की जड़ (माँ) है।”
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 50% अपराधों के पीछे या तो शराब या कोई और नशे की चीज़ होती है।
इसमें हत्या, बलात्कार, घरेलू हिंसा और दुर्घटनाएं शामिल हैं।
शराब से कैसे छुटकारा पाएं?
ईमान मज़बूत करें: अल्लाह के वादों और उसकी मनाही पर यकीन रखें।
मानें कि यह बीमारी है: इलाज के लिए पहले बीमारी को बीमारी मानना ज़रूरी है।
सरकारी मदद लें: भारत सरकार की नशामुक्ति हेल्पलाइन पर कॉल करें —14446
शराब एक ऐसी चीज़ है जो देखने में तो चमकदार लगती है, लेकिन असल में यह इंसान को जमीन से उठा कर कब्र तक ले जाती है — और वहाँ से जहन्नम के रास्ते पर भी डाल देती है।
“शराब से बचिए, और दूसरों को भी बचाइए — क्योंकि यही वह ज़हर है जो ना सिर्फ़ आपकी सेहत, बल्कि आपकी रूह और आख़िरत को भी तबाह कर देता है।”
मुहम्मद सोहैल
Disclaimer
Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.
Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।
