कानाराम बैरवा का दावा वह राजा मानसिंह हैं
राजस्थान के टोंक जिले के जेफाबाद गांव का एक 10 साल का बच्चा, कानाराम बैरवा, खुद को आमेर के महान शासक राजा मानसिंह होने का दावा कर रहा है।
ऐतिहासिक दावों का फैक्ट चेक:-
आमेर का किला और हल्दीघाटी:
दावा: बच्चे का कहना है कि उसने ही आमेर का किला बनवाया और हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप से युद्ध लड़ा।
फैक्ट चेक: इतिहास के अनुसार, राजा मानसिंह प्रथम ने 1592 में आमेर किले का निर्माण शुरू करवाया था और वे अकबर के प्रधान सेनापति थे।
शीला माता की मूर्ति:
दावा: वह बंगाल से शीला माता की मूर्ति लाया था। उसने बताया कि पहले वह नरबलि देता था, जिसे बाद में पशु बलि में बदल दिया गया, जिससे माता नाराज हो गईं और उनकी गर्दन तिरछी हो गई। [
फैक्ट चेक: यह ऐतिहासिक लोक कथाओं से मेल खाता है। राजा मानसिंह बंगाल के राजा केदार को हराकर शीला देवी की मूर्ति लाए थे और गर्दन तिरछी होने की कहानी स्थानीय मान्यताओं में प्रसिद्ध है।
मृत्यु और अस्पताल का रहस्य:
दावा: बच्चा कहता है कि जयपुर का SMS अस्पताल उसी के नाम पर है और उसकी मौत दुश्मनों द्वारा अनाज मंडी में भाले मारने से हुई थी।
फैक्ट चेक: यहाँ बच्चा गलत साबित होता है। SMS अस्पताल 20वीं सदी के सवाई मानसिंह द्वितीय के नाम पर है, न कि मानसिंह प्रथम के। साथ ही, राजा मानसिंह की मृत्यु 1614 में महाराष्ट्र के एलिसपुर में स्वाभाविक रूप से हुई थी।
मनोवैज्ञानिकों के हवाले से बताया गया है कि यह पुनर्जन्म से ज्यादा एक मनोवैज्ञानिक भ्रम हो सकता है। बच्चे अक्सर सुनी-सुनाई कहानियों या टीवी सीरियल्स से प्रभावित होकर खुद को उन किरदारों से जोड़ लेते हैं।
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