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युद्ध विराम के बाद ट्रम्प और नेतन्याहू के लिए कुर्सी बचाना मुश्किल

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अमेरिका इजराईल और ईरान के बीच 40 दिन तक ऐतिहासिक युद्ध हुआ। इस युद्ध में अमेरिका ने अपना विश्व शक्तिमान का ओहदा खो दिया। जिस अमेरिका का आदेश विश्व का कोई भी देश नहीं मानने की हिम्मत नहीं रखता था, आज कमजोर और छोटे देश उसको इस युद्ध के बाद आंख दिखाने लगे हैं। इजराईल का बुरा हाल अमेरिका से भी ज्यादा है। इजराईल ने पूर्व पश्चिम एशिया में एक ऐसी छवि बनाली थी जिसके कारण मुस्लिम देश इजराईल से खौंप खाते थे। इजराईल ने फिलिस्तीन में लाखों बच्चों, महिलाओं और मर्दों को मौत के मुंह उतार दिया। इससे पहले भी मुस्लिम देशों में समय-समय पर इजराईल हमले करके भय बनाए रखा। इस युद्ध के बाद इजराईल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जो इजराईल अपने पड़ोसी देशों की सीमाओं को क्ब्जायें  जाने के लिए विख्यात था आज वही इजराईल अपनी स्वयं की सीमाओं को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। इजराईल और अमेरिका के राष्ट्रध्यक्षों ने मिलकर ईरान पर भयंकर हमले किए और ईरान को पूरी तरह बर्बाद करने वहां रिजीम चेंज करने की बडी कोशिश की। लेकिन अमेरिका इजराईल यह सब करने में फेल हो गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एपिस्टीन  फाईल के विवादों के कारण अमेरिका में जनता का बड़ा विरोध झेल रहे हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपिस्टीन फाइलों के कारण हो रहे विरोध को दबाने के लिए ईरान पर आक्रमण को तैयार हुए थे। इजराईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप की मजबूरी का पूरा फायदा उठाया और ट्रंप को ब्लैकमेल किया। लेकिन बिना किसी कारण के ईरान पर आक्रमण करना अमेरिका और इजराईल दोनों को भारी पड़ गया। अमेरिका इजराईल को ईरान ने इस युद्ध में कभी नहीं भूलने वाली पिटाई की। यही कारण है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का विरोध दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की कुर्सी तब तक ही बची हुई है जब तक ईरान से युद्ध चल रहा है। जैसे ही युद्ध समाप्त होगा, अमेरिकी जनता डोनाल्ड ट्रंप से कुर्सी छीन लेगी । इसी तरह इजराईल के प्रधानमंत्री पर भी इजराईल की अदालतों में मुकदमें चल रहे हैं । प्रधानमंत्री बेंजामिन की कुर्सी युद्ध के कारण बची हुई है। जैसे ही युद्ध बंद होगा प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपने ही देश में सलाखों के पीछे होंगे। यह युद्ध देशों के बीच जरूर है, लेकिन यह युद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की और इजराईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की करतूतों को छुपाने के लिए किया गया है। इन दोनों राष्ट्र अध्यक्षों ने अपनी सनक और नफरत और बुरी आदतों के चलते अपने-अपने देशों को बर्बाद कर दिया। दूसरी तरफ ईरान को इस युद्ध से बड़ा फायदा होने वाला है। ईरान पर 40 वर्षों से चले आ रहे आर्थिक प्रतिबंध  एक तरह से समाप्त हो गए हैं। क्योंकि अमेरिका अब अपनी मनमानी करने की स्थिति में नहीं है। जबकि ईरान के लिए व्यापार के सभी रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं।

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